ये है समझदार किसान! जिस खेत से दूसरे बर्बाद, वहां 3 फसलें उगाकर लाखों कमाया, जानें कैसे

ये है समझदार किसान! जिस खेत से दूसरे बर्बाद, वहां 3 फसलें उगाकर लाखों कमाया, जानें कैसे


Success Story: छतरपुर के किसान वैद्यनाथ पाल जिनके पास खुद की जमीन नहीं है. लेकिन, खेती सालों से कर रहे हैं. साथ ही पशुपालन भी करते हैं. हर साल परंपरागत खेती से मुनाफा नहीं होता था, लेकिन इस बार उन्हें कृषि एक्सपर्ट से सलाह मिली और असिंचित जमीन पर चना, मसूर और सरसों की मिश्रित खेती की. इस सलाह ने किसान के घाटे को मुनाफे में बदल दिया. इस बार 3 महीने में 4 एकड़ से डेढ़ लाख से ज्यादा की कमाई कर ली. उनकी मेहनत अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है.

बंटाई से करते हैं खेती 
किसान ने बताया, वह बंटाई की खेती लेते हैं. जिस खेत से दूसरे किसान भाई हार मान लेते हैं, उसे खेत से वह मुनाफा कमा लेते हैं. अभी हमने 4 एकड़ खेत बंटाई को लिया था. इस खेत में 5 पसेरी का बीघा निकलता था, लेकिन इस बार हमनें 4 एकड़ में ही 16 क्विंटल फसल निकाली है. इस फसल का सरकारी भाव भी आसमान छू रहा है. किसान ने बताया, गौरिहार क्षेत्र के किसान भाई एक खेत में एक ही फसल लगा देते हैं, जिससे उन्हें घाटा लग जाता है. जमीन भी सिंचित नहीं है, भगवान के भरोसे किसान रहते हैं. लेकिन, हमने इस खेत में मिश्रित फसलें उगाईं जिससे बढ़िया उत्पादन हुआ है.

मटर से किसानों को घाटा 
किसान ने बताया, छतरपुर के इस क्षेत्र में ज्यादातर किसानों ने हरी मटर की खेती की. मुझे भी किसान भाइयों ने हरी मटर बोने का सुझाव दिया था, लेकिन मैंने कहा, भाई मैं 12 हजार रुपए क्विंटल मटर खरीदकर बुवाई नहीं कर सकता. इसके बाद मैंने वही परंपरागत फसल चना, मसूर और सरसों की बोवनी की. इसका बीज मेरे घर में ही रखा था. इस फसल की खासियत है कि इसमें पानी की अलग से ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है. इस बार मिट्टी में इतना शीत था कि ये फसलें आराम से हो सकती थीं.

मौसम के अनुकूल परंपरागत फसलें 
किसान बताते हैं कि उन्होंने 4 एकड़ में चना, सरसों और मसूर की खेती की. सरसों फसल ऊपर बढ़ती है वहीं और चना, मसूर जमीन पर ही फैल जाता है. मैंने मिश्रित खेती इसलिए की क्योंकि इन फसलों का सरकारी भाव अच्छा है और ये फसलें असिंचित जमीन में भी हो जाती हैं. नवंबर के आखिरी दिनों में फसल की बोवनी की थी.  लगभग 100 दिन बाद फसल काटने लायक तैयार हो जाती है. 4 एकड़ की फसल मैं और मेरी पत्नी ने काट ली. खेत पर ही थ्रेसिंग करके फसल निकाल ली. सरसों और मसूर पहले ही निकाल लिया था. अब चना निकाल रहे हैं.

20 हजार का भूसा भी मिला
किसान वैद्यनाथ बताते हैं कि 4 एकड़ की असिंचित जमीन में 6 क्विंटल मसूर निकला है, 3 क्विंटल सरसों निकला है और 7 क्विंटल चना निकला है. हालांकि, सरसों का उत्पादन कम हुआ है लेकिन दूसरे किसान भाइयों से बहुत बेहतर उत्पादन हुआ है. फसल के साथ ही लगभग 20 हजार रुपए का भूसा भी निकल आया है.‌ किसान बताते हैं कि जिन किसान भाइयों ने खेत में सिर्फ हरा मटर लगाया था. वह किसान बर्बाद हो गए है. क्योंकि, 12 हजार रुपए क्विंटल बीज खरीदकर बोवनी की थी और अब भाव 3 हजार रुपए है. अगर मैंने भी ये गलती की होती तो मैं भी बर्बाद हो जाता.

ऐसे की थी बोवनी 
किसान ने 1 बीघा के हिसाब से 15 किलो चना, साथ ही 100 से 150 ग्राम सरसों, वहीं सरसों के साथ 8 से 9 किलो मसूर की बोवनी की थी. किसान बताते हैं कि वैसे तो मैंने 10 बीघा में खेती की है. जिसमें 10 हजार रुपए की लागत आई है. लेकिन 2 एकड़ की मिश्रित खेती की जुताई-बुवाई में कुल 5 हज़ार की लागत आई है. बताया कि खेत में जितने महीने फसल रहती है, उतने दिन तक पशुओं को चारा भी यहीं से मिलता रहता है.

इस अनुपात में बीज की बोवनी की 
अगर आप सीडड्रिल मशीन से बुवाई कर रहे हैं तो मशीन में इसी अनुपात में एकसाथ बीज मिक्स कर लेना हैं. जैसे 1 बीघा में सरसों और चना एकसाथ लगा रहे हैं तो 15 किलो चना और 100 ग्राम सरसों का बीज का अनुपात रखें. वहीं 1 बीघा में सरसों और मसूर लगा रहें तो 100 ग्राम सरसों के साथ 8 किलो मसूर का अनुपात रखें.

एक खेत में 3 फसलें संभव 
नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ कृषि एक्सपर्ट डॉ. राजीव सिंह के मुताबिक अगर आप तीन फसलों की खेती एक ही खेत में करना चाहते हैं तो भी कर सकते हैं. लेकिन सरसों के साथ ही लगा सकते हैं. सरसों के साथ मसूर और चना तीनों को एकसाथ लगा सकते हैं. 1 बीघा में 100 ग्राम सरसों के साथ 4 किलो मसूर और 7 किलो चना का अनुपात रख सकते हैं.मिक्स खेती करके किसान की लागत भी कम रहती है और मुनाफा डबल हो जाता है. क्योंकि इन फसलों के भाव में भी अंतर होता है. साथ ही मौसम की मार से तीनों फसलों को नुकसान नहीं होता है.



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