ग्वालियर हाईकोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह फटकार विभागीय कार्रवाई में लापरवाही और दोषी अधिकारी को बचाने के प्रयास के लिए लगाई। न्यायालय ने कहा कि इतने उच्च पद पर बैठे अधिकारी को कानून, संविधान के अनुच्छेद 141 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जानकारी न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने जोर दिया कि राज्य की संपत्ति जनता की है और अधिकारी उसके ट्रस्टी के रूप में जिम्मेदारी से काम करें। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसमें उन्हें बताना होगा कि गलतियों को सुधारने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को जस्टिस जीएस अहलुवालिया की एकलपीठ में होगी। यह पूरा मामला दीनारपुर में उद्योग विभाग की सात करोड़ रुपए की जमीन से जुड़ा है। इस जमीन को लेकर शासन एक मुकदमा हार गया था। जमीन बचाने के लिए अपील दायर करने में अधिकारियों द्वारा की गई देरी का फायदा निजी पक्षों को मिला। हाईकोर्ट ने इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। इस पर तत्कालीन एसडीएम की वेतन वृद्धि रोकने की मामूली सजा दी गई थी, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव को तलब किया था। जब आरोप गंभीर थे तो पूर्ण विभागीय जांच क्यों नहीं कराई? भूमि के मूल्य की सही जानकारी के बिना कार्रवाई की गई सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित मामले में भूमि के मूल्य की सही जानकारी लिए बिना ही कार्रवाई की गई और विभागीय जांच को कारण बताओ नोटिस में बदल दिया गया, जिससे दोषी अधिकारी पर बड़ी कार्रवाई की संभावना समाप्त हो गई। प्रमुख सचिव ने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें अब समझ आया है कि उनके निर्णय से दोषी अधिकारी को बड़ी सजा से बचाव मिल गया। उन्होंने अदालत से सुधार का अवसर देने की प्रार्थना की।
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