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Sachin Tendulkar Fielding for Pakistan: इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत का गौरव बनने से दो साल पहले 13 वर्षीय सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान की जर्सी पहनकर मैदान पर कदम रखा था. 1987 में मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में एक प्रदर्शनी मैच के दौरान खिलाड़ियों की कमी होने पर इमरान खान की टीम के लिए सचिन ने सब्सिट्यूट फील्डर के रूप में फील्डिंग की थी. नियति का खेल देखिए, जिस खिलाड़ी ने भविष्य में पाकिस्तान के पसीने छुड़ाए, उसका पहला ‘इंटरनेशनल’ अनुभव उसी टीम के साथ शुरू हुआ था.
सचिन ने मुंबई में पाकिस्तान के लिए 1987 में फील्डिंग की थी.
नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में सचिन तेंदुलकर का नाम आते ही नीली जर्सी और भारतीय तिरंगे की छवि जेहन में उभरती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के लिए डेब्यू करने से दो साल पहले मास्टर ब्लास्टर पाकिस्तान की सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे थे. यह सुनने में किसी फिल्मी पटकथा जैसा लगता है, लेकिन यह क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा रोचक और दुर्लभ सच है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. उस ऐतिहासिक दिन की कहानी पर नजर डालते हैं जब 13 साल का एक बच्चा पाकिस्तान के लिए फील्डिंग करने उतरा था.
20 जनवरी 1987 को क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) की गोल्डन जुबली पर मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच प्रदर्शनी मैच खेला गया. उस मैच में पाकिस्तान टीम की कमान इमरान खान (Imran Khan) संभाल रहे थे. एग्जीबिशन मैच 40-40 ओवर का था. जिस समय भारतीय टीम बल्लेबाजी कर रही थी, उस दौरान लंच के समय जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर चले गए. ऐसे समय में पाकिस्तान के पास सब्सटीट्सूट खिलाड़ी का विकल्प नहीं था. जिसके बाद सचिन तेंदुलकर को फील्डिंग के लिए मैदान पर भेजा गया.
सचिन ने मुंबई में पाकिस्तान के लिए 1987 में फील्डिंग की थी.
अपनी ऑटो बायोग्राफी ‘प्लेइंग इट माय वे’ में मास्टर ब्लास्टर ने इस बात का जिक्र भी किया है. उन्होंने लिखा है कि भारत के लिए 1989 में डेब्यू करने से पहले मैंने 1987 में पाकिस्तान की तरफ से खेला था. पाकिस्तान के लिए एक मैच में भारत के खिलाफ फील्डिंग करने उतरे थे. सचिन ने लिखा कि पकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान को शायद ही ये बात याद हो कि उन्होंने मुझे मैदान पर फील्डिंग के लिए लगाया था.
इमरान खान की मदद के लिए आए ‘नन्हे’ सचिन
डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, सचिन तेंदुलकर के बचपन के दोस्त मार्कर्स कूटो ने बताया कि सचिन तब अपने 14वें जन्मदिन से दूर थे और जब मैदान पर उतरने का मौका दिखा तो बेहद उत्साहित हो गए. उन्होंने बताया, पाकिस्तान के कुछ खिलाड़ी आराम के लिए होटल चले गए. इसके बाद इमरान खान सीसीसीआई कप्तान हेमंत करकरे के पास आए और कहा कि उन्हें तीन-चार खिलाड़ी चाहिए जो फील्डिंग कर सकें. सचिन ने हेमंत की ओर देखा और मराठी में पूछा, मी जाउ का, मतलब क्या मैं जा सकता हूं. इससे पहले कि हेमंत सहमति देते, सचिन मैदान पर फील्डिंग के लिए उतर चुके थे. मैच खत्म होने वाला था और सचिन ने 25 मिनट तक फील्डिंग की.
‘अगर मैंने कपिल देव का कैच पकड़ लिया होता तो शायद इतिहास कुछ और होता’
सचिन तेंदुलकर ने बाद में मजाकिया अंदाज में कहा था, ‘अगर मैंने वह कैच पकड़ लिया होता, तो शायद इतिहास कुछ और होता.’ वह लड़का जो पाकिस्तान के लिए फील्डिंग कर रहा था, ठीक दो साल बाद (1989) उसी पाकिस्तान के खिलाफ कराची में अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाला था. सचिन की काबिलियत को राज सिंह डूंगरपुर ने पहचान लिया था और फर्स्ट क्लास क्रिकेट के एक सत्र के बाद ही 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया में उन्हें चुनने का पूरा श्रेय डूंगरपुर को ही जाता है. हालांकि अपने करियर के पहले मैच में सचिन सिर्फ 15 रन ही बना पाए थे. उन्हें वकार यूनुस ने बोल्ड किया था. यूनुस ने भी इसी मैच में डेब्यू किया था.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें