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MP School Demolition Order: जबलपुर में शिक्षा विभाग के एक आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. 141 जर्जर स्कूल भवनों को गिराने की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंप दी गई है. इस फैसले के बाद शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है और इसे जोखिम भरा बताया है. विभाग के पास इंजीनियर होने के बावजूद शिक्षकों पर यह जिम्मेदारी डालने पर सवाल उठ रहे हैं. जानिए पूरा मामला और क्या हो सकता है आगे.
Jabalpur News: जबलपुर में शिक्षा विभाग का एक अजीबोगरीब आदेश सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षक समुदाय को चौंका दिया है. जिले के 141 जर्जर सरकारी स्कूल भवनों को गिराने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों की निगरानी में दी गई है. यानी जो शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं, अब उन्हें स्कूल तोड़ने का काम भी देखना पड़ेगा.
क्यों लिया गया ये फैसला
दरअसल, इन 141 स्कूल भवनों को पीडब्ल्यूडी ने पहले ही “अति जर्जर” और “खतरनाक” घोषित कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक ये इमारतें कभी भी गिर सकती हैं और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. हाल ही में कटनी में एक स्कूल भवन गिरने से एक बच्ची की मौत भी हो चुकी है, जिसके बाद प्रशासन और सतर्क हो गया है.
शिक्षकों की निगरानी में होंगे काम
सबसे बड़ा सवाल था कि इन भवनों को गिराएगा कौन? ग्रामीण इलाकों में पंचायतों के पास बजट नहीं है. ऐसे में कलेक्टर की बैठक में फैसला लिया गया कि स्कूल संपत्ति होने के कारण इसे शिक्षकों की निगरानी में ही गिरवाया जाए. इसके लिए विभाग सिर्फ 10 हजार रुपये देगा. अगर खर्च ज्यादा आता है, तो मलबा बेचकर मजदूरी देने के निर्देश दिए गए हैं.
शिक्षक संघ का विरोध
इस फैसले से शिक्षक संघ नाराज हो गया है. उनका कहना है कि पहले ही उन पर पढ़ाई के अलावा कई जिम्मेदारियां हैं चुनाव ड्यूटी, मिड-डे मील, सर्वे और कॉपियां जांचना. अब बिल्डिंग गिराने जैसे खतरनाक और तकनीकी काम भी दे दिए गए हैं. शिक्षकों का साफ कहना है कि हम इंजीनियर नहीं हैं, हम पढ़ाने के लिए हैं.
जब इंजीनियर हैं, तो शिक्षक क्यों?
सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि शिक्षा विभाग के पास खुद के 12 इंजीनियर मौजूद हैं, जो निर्माण कार्य देखते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तकनीकी टीम उपलब्ध है, तो शिक्षकों को इस जोखिम भरे काम में क्यों लगाया जा रहा है? अब देखना होगा कि इस आदेश में कोई बदलाव होता है या नहीं. फिलहाल शिक्षक असमंजस में हैं कि उन्हें बच्चों को पढ़ाना है या स्कूल तोड़ने की जिम्मेदारी निभानी है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें