ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर और जिला कोर्ट परिसर में बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने सर्चिंग कर बम की तलाश की। जब बम डिस्पोजल टीम तलाशी कर रही थी, तो यह खबर भी फैल गई थी कि हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला। वहीं, इस सर्चिंग पर ग्वालियर पुलिस का कहना है कि यह रूटीन चेकिंग के तहत मॉक ड्रिल थी। कहीं से भी कोई धमकी नहीं मिली है। हर माह एक से दो इस तरह की मॉक ड्रिल होती रहती हैं। इस मॉक ड्रिल के चलते बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने कड़ी चेकिंग कर कोर्ट परिसर का कोना-कोना छान लिया। ग्वालियर हाईकोर्ट में शुक्रवार दोपहर अचानक पुलिस की बढ़ती उपस्थिति और बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) की टीम को देखकर अफवाह उड़ गई कि हाईकोर्ट में बम होने की सूचना है। लेकिन वहां मौजूद बीडीएस टीम ने लोगों को बताया कि यह एक मॉक ड्रिल का हिस्सा है। उन्हें इस तरह से कार्रवाई करनी है, जैसे किसी आपातकालीन स्थिति में की जाती है। बीडीएस दल ने हाईकोर्ट परिसर के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में भी पहुंचकर छानबीन की। इस दौरान वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। कोर्ट परिसर में मॉक ड्रिल के तहत बम डिटेक्ट कर रही टीम पूरी तरह एंटी बम डिस्पोजल स्क्वॉड से लैस थी। आसपास पुलिस भी मौजूद रही। इस दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया। ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि धमकी मिली है, ऐसा कुछ भी इनपुट नहीं है। यह नियमित मॉकड्रिल का एक पार्ट है। हर माह इस तरह की मॉकड्रिल कोर्ट परिसर में की जाती है।
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