घने जंगलों के बीच विराजमान हिंगलाज माता, यहां है चमत्कारी ‘अमृत पंचधारा’

घने जंगलों के बीच विराजमान हिंगलाज माता, यहां है चमत्कारी ‘अमृत पंचधारा’


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Hinglaj Mata Temple Narsinghpur: मंदिर तक पहुंचना हरगिज आसान नहीं है. पथरीले रास्ते, घना जंगल और खतरनाक चढ़ाई लेकिन आस्था के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है. मान्यता है कि हिंगलाज माता उसी भक्त को मंदिर बुलाती हैं, जिसपर उनकी कृपा होती है.

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हिंगलाज माता मंदिर 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

रिपोर्ट- राहुल मेहरा, नरसिंहपुर. चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर न्यूज 18 आपको दर्शन कराने जा रहा है एक ऐसे रहस्यमयी मंदिर के, जो घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित है. यहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं लेकिन कहते हैं, मां जिसकी पुकार सुन लें, वही इस धाम तक पहुंच पाता है हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के जंगलों में स्थित हिंगलाज माता मंदिर की. नरसिंहपुर में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों और करीब 3000 फीट ऊंची पहाड़ी पर मां हिंगलाज का यह प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर स्थित है. इस मंदिर को करीब 40 साल पहले ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने बनवाया था.

मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है. ऊबड़-खाबड़ रास्ते, घना जंगल और खतरनाक चढ़ाई लेकिन आस्था के आगे हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है. मान्यता है कि मां हिंगलाज उसी भक्त को बुलाती हैं, जिसपर उनकी कृपा होती है. चैत्र नवरात्रि के दौरान खासतौर पर सप्तमी और अष्टमी के दिन यहां श्रद्धालुओं की आस्था अपने चरम पर होती है. भक्त कठिन रास्तों को पार कर मां के दरबार में पहुंचते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

जंगल के बीच प्रकट हुई ‘अमृत पंचधारा’
बताया जाता है कि इस स्थान पर ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य और उनके गुरुओं ने कठोर तप किया था. उनकी तपस्या के प्रभाव से यहां घने जंगल के बीच ‘अमृत पंचधारा’ प्रकट हुई, जिसका जल आज भी चमत्कारी माना जाता है. ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज तब तक जीवित रहे, जब तक उन्होंने यहीं का जल ग्रहण किया, चाहें वह विदेश में रहे या फिर कहीं और.

साधारण नहीं ‘अमृत पंचधारा’ का जल
स्थानीय पुजारियों का दावा है कि इस ‘अमृत पंचधारा’ का जल साधारण नहीं है. इसका सेवन करने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं. यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. न्यूज 18 की टीम इस रहस्य को जानने के लिए उस गुफा तक भी पहुंची, जहां करीब 1000 फीट नीचे गहराई में ब्रह्मलीन शंकराचार्य और उनके गुरुओं ने तपस्या की थी. गुफा के पास बहता झरना इस स्थान की दिव्यता को और बढ़ा देता है. घने जंगल, रहस्यमयी गुफाएं और आस्था से भरा यह मंदिर, वाकई हिंगलाज माता का यह धाम अपने आप में कई अनसुलझे रहस्यों को समेटे हुए है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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