जयभान सिंह पवैया 6वें वित्त आयोग के अध्यक्ष बने: ग्वालियर में जश्न का माहौल; पूर्व मंत्री बोले-मां भगवती का आदेश मानकर करूंगा सेवा – Gwalior News

जयभान सिंह पवैया 6वें वित्त आयोग के अध्यक्ष बने:  ग्वालियर में जश्न का माहौल; पूर्व मंत्री बोले-मां भगवती का आदेश मानकर करूंगा सेवा – Gwalior News




महाराष्ट्र के सहप्रभारी और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस घोषणा के बाद ग्वालियर स्थित उनके आवास पर समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। ढोल-नगाड़े बजाए गए और लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। पवैया को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष बनाए जाने पर जयभान सिंह पवैया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुझे कल शाम को जब सूचना मिली, तो मैंने अनुभव किया कि नवरात्रि के पहले दिन की संध्या को जगदंबा मां ने मुझे कोई आदेश दिया है। पवैया ने कहा कि वह मध्य प्रदेश की जनता की सेवा करने के इस दायित्व को भगवती के चरणों में अर्पित करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की। पवैया ने कहा कि इन नेताओं ने एक उच्च संवैधानिक संस्था, वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी क्षमताओं को परखा और उन पर विश्वास जताया। वित्त के सदुपयोग और पारदर्शिता पर जोर, पवैया ने रखी प्राथमिकताएं जयभान सिंह पवैया ने कहा कि केंद्र से लेकर मध्य प्रदेश तक के संगठन के सभी पदाधिकारियों और पार्टी के प्रमुखों का भी आभार व्यक्त किया। पवैया ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही यह एक संवैधानिक संस्था हो, लेकिन अपनी ‘मां’ (संगठन) को नहीं भूला जा सकता, जिसके कारण वह आज सेवा के लायक बने हैं। उन्होंने संगठन का भी कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने यह अवसर प्रदान किया। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और कार्यभार संभालने के बाद ही वह इस पर अधिक चर्चा कर पाएंगे। पवैया ने अध्ययन करने और मध्य प्रदेश का व्यापक भ्रमण करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि जमीनी हकीकत को समझा जा सके। उन्होंने कहा कि आयोग की भूमिका निकायों के बीच, गांव से लेकर महानगरों तक, वित्त का न्यायपूर्ण वितरण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की सलाहकार होती है। इसके लिए गहन अध्ययन की आवश्यकता होगी। पवैया ने अपनी स्वभाव के अनुरूप वित्त के सदुपयोग की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने पहले दिन प्रभु रामलला से प्रार्थना की कि उन्हें जो भी भूमिका दी गई है, वह उसे बिना किसी दाग के निभा सकें और भगवान उन्हें यह शक्ति प्रदान करें।



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