हरदा में गणगौर महोत्सव का समापन: रनूबाई को गीतों संग विदाई; ज्वारों का विसर्जन अजनाल नदी घाट पर हुआ – Harda News

हरदा में गणगौर महोत्सव का समापन:  रनूबाई को गीतों संग विदाई; ज्वारों का विसर्जन अजनाल नदी घाट पर हुआ – Harda News




हरदा जिले में नौ दिवसीय गणगौर महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक गणगौर गीत गाकर मां रनूबाई को भावुक विदाई दी। विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। वैशाख मास में मनाए गए इस महोत्सव के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु गणगौर स्थल पर एकत्र हुए। उन्होंने बेटी स्वरूपा रनूबाई और जंवाई स्वरूप धणियर राजा को भावुक मन से विदाई दी। माता रानी का पंडाल श्रद्धालुओं से भरा रहा, जहां रनूबाई, धणियर और ज्वारों के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी। महोत्सव के समापन पर परिवार के सदस्यों द्वारा गणगौर की विदाई की गई। इस दौरान शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए नदी तक एक विदाई जुलूस निकाला गया, जिसके बाद ज्वारों का विसर्जन किया गया। शहर के मुख्य मार्गों से निकले चल समारोह में श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों की धुन पर नृत्य किया और झालरें सजाईं। उन्होंने माता रनूबाई के रथ की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने धणियर राजा के साथ माता को सुख-समृद्धि का प्रतीक मानते हुए पूजा की। महोत्सव की समाप्ति पर पेड़ीघाट पर
इधर, गणगौर महोत्सव के नौ दिनों तक रात्रिकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। विभिन्न मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया। लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी प्रस्तुतियां इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहीं। महोत्सव की समाप्ति पर अजनाल नदी के पेड़ीघाट पर विधि-विधान से ज्वारों का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालु भावुक हो उठे और धणियर राजा तथा रनूबाई से अगले वर्ष फिर पधारने की प्रार्थना करते दिखाई दिए। जिले में गणगौर महोत्सव चैत्र और वैशाख माह में वर्षों से पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इसमें बेटियों और परिवार की समृद्धि के लिए रनूबाई और धणियर राजा की पूजा-अर्चना की जाती है।



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