IPL में अंपायरों पर होती है पैसों की बारिश, 1 मैच की फीस जानकर रह जाएंगे हैरान

IPL में अंपायरों पर होती है पैसों की बारिश, 1 मैच की फीस जानकर रह जाएंगे हैरान


नई दिल्ली. आईपीएल केवल चौकों-छक्कों और खिलाड़ियों पर होने वाली करोड़ों की नीलामी का खेल नहीं है. बल्कि यह उन अंपायरों के लिए भी ‘कुबेर का खजाना’ साबित होता है जो मैदान पर हर गेंद पर पैनी नजर रखते हैं. अगर आपको लगता है कि सिर्फ खिलाड़ी ही मालामाल होते हैं, तो आपको अंपायरों की सैलरी पैकेज पर एक नजर डालनी चाहिए. आईपीएल में अंपायरों की कमाई इंटरनेशनल टी20 मैचों (T20I) की तुलना में कहीं अधिक है. आईपीएल के दो महीनों में अंपायर खूब पैसा कमाते हैं.

क्रिकेट की दुनिया में आईपीएल को ‘कैश-रिच लीग’ कहा जाता है. और यह बात अंपायरों की फीस पर भी लागू होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईपीएल के एक मैच में ऑन-फील्ड अंपायरिंग करने के लिए एक अनुभवी अंपायर को लगभग 3 लाख रुपए मिलते हैं. इसके उलट, अगर वही अंपायर किसी टी20 इंटरनेशनल मैच में अंपायरिंग करता है, तो उसे प्रति मैच लगभग 1.13 लाख से 1.25 लाख रुपए के बीच मिलते हैं. यानी आईपीएल में सिर्फ एक मैच में खड़ा होने पर अंपायर को इंटरनेशनल मैच के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा पैसा मिलता है.

आईपीएल में अंपायर को मिलती है छप्पड़फाड़ सैलरी.

अंपायरों की कैटेगरी और कमाई का गणित
बीसीसीआई ने अंपायरों को उनके अनुभव और प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटा है. आईपीएल में मुख्य रूप से दो तरह के पैनल होते हैं. पहला एलीट पैनल जिसमें नितिन मेनन, अनिल चौधरी और क्रिस्टोफर गफ्फानी जैसे अनुभवी नाम शामिल होते हैं. इन अंपायरों की फीस सबसे ज्यादा होती है. सीजन के अंत तक एक एलीट अंपायर केवल मैच फीस और भत्तों से ही 40 से 50 लाख रुपए तक कमा लेता है.

डेवलपमेंट पैनल
ये वे अंपायर होते हैं जो घरेलू क्रिकेट से ऊपर आए हैं और आईपीएल में अनुभव ले रहे हैं. इनकी मैच फीस एलीट पैनल से थोड़ी कम (लगभग 1 लाख से 1.5 लाख के बीच) हो सकती है. लेकिन यह भी किसी भी अन्य लीग से बेहतर है. अंपायरों की कमाई सिर्फ मैच फीस तक सीमित नहीं है.उन्हें कई अन्य तरह के भुगतान भी किए जाते हैं. जिसमें दैनिक भत्ता, मैचों के दौरान अंपायरों को लगभग 12,500 रुपए प्रतिदिन का भत्ता मिलता है, जो उनके होटल और खाने-पीने के खर्चों के लिए होता है. क्या आपने गौर किया है कि अंपायरों की जर्सी पर किसी कंपनी का लोगो (जैसे पहले Paytm या अब अन्य ब्रांड) होता है. इस स्पॉन्सरशिप का एक हिस्सा अंपायरों को भी मिलता है. एक सीजन में यह राशि 7 लाख रुपए के आसपास हो सकती है.

60 दिन और लाखों का पैकेज
एक आईपीएल सीजन लगभग 60 दिनों तक चलता है. एक औसत अंपायर पूरे सीजन में करीब 15 से 20 मैचों में अपनी सेवाएं देता है (जिसमें ऑन-फील्ड, थर्ड अंपायर और फोर्थ अंपायर की भूमिका शामिल है).

कमाई का एक अनुमानित चार्ट:

मैच फीस (15 मैच): 15 x 3,00,000 = 45,00,000 रुपए.

स्पॉन्सरशिप: 7,30,000 रुपए

कुल: लगभग 52 लाख रुपए से अधिक.

इतनी भारी फीस के पीछे की वजह
अंपायरों को इतना पैसा देने के पीछे बीसीसीआई का तर्क बिल्कुल साफ है सटीकता और दबाव. आईपीएल एक हाई-प्रोफाइल लीग है जहाँ करोड़ों रुपए दांव पर लगे होते हैं. एक गलत फैसला मैच का रुख बदल सकता है और अंपायर को भारी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है. इस भारी मानसिक दबाव को झेलने और तकनीक (DRS, UltraEdge) के साथ तालमेल बिठाने के लिए उन्हें यह प्रीमियम सैलरी दी जाती है. यही कारण है कि आज दुनिया भर के बेहतरीन अंपायर आईपीएल का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक रहते हैं. यह न केवल उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें बेहद मजबूत बनाता है.



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