बचपन में नाना-नानी को तड़पते देखा था, आज उसी ‘दर्द’ की स्पेशलिस्ट, किसी फिल्म जैसी ये कहानी

बचपन में नाना-नानी को तड़पते देखा था, आज उसी ‘दर्द’ की स्पेशलिस्ट, किसी फिल्म जैसी ये कहानी


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Doctor Success Story: बचपन के एक घटना के कारण शहडोल के छोटे से कस्बे से निकलकर डॉ. कीर्ति द्विवेदी अग्रवाल आज चेस्ट और लंग स्पेशलिस्ट के रूप में पहचान बना चुकी हैं. कोटा से मेडिकल तैयारी और उज्जैन में स्पेशलाइजेशन के बाद अब वे मरीजों को नई जिंदगी देने में जुटी हैं. उनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. जानें…

Success Story: बचपन में देखे गए दर्दनाक दृश्य कई बार जिंदगी की दिशा तय कर देते हैं. कुछ ऐसा ही हुआ डॉ. कीर्ति द्विवेदी अग्रवाल के साथ, जिन्होंने अपनी नानी को लंग कैंसर और नाना को टीबी से जूझते देखा, उनके मन में एक सवाल बार-बार उठता था कि क्या इन बीमारियों से लोगों को कम समय में बचाया नहीं जा सकता? इसी सवाल ने धीरे-धीरे उनके भीतर एक जुनून पैदा किया, जिसने उन्हें आज एक सफल चेस्ट और लंग स्पेशलिस्ट बना दिया. आज वे न केवल मरीजों का इलाज कर रही हैं, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं.

बचपन की घटना ने तय की दिशा
लोकल 18 से बातचीत में डॉ. कीर्ति ने बताया, उनके परिवार में रेस्पिरेट्री बीमारियों का गहरा असर रहा. नानी लंग कैंसर से पीड़ित थीं और नाना क्रोनिक स्मोकर होने के कारण टीबी से जूझ रहे थे. बचपन में इन दोनों को तड़पते देख उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि वह इस क्षेत्र में कुछ बड़ा करेंगी. यही कारण रहा कि उन्होंने मेडिकल फील्ड में आने के बाद भी पल्मोनोलॉजी को ही अपना लक्ष्य बनाया और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
शहडोल जिले के पास जयसिंहनगर जैसे छोटे क्षेत्र से आने वाली कीर्ति के लिए यह सफर आसान नहीं था. उनके पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी, जिससे उन्हें मजबूत आधार मिला. उनकी शुरुआती पढ़ाई आदित्य बिरला स्कूल में हुई, जबकि 11वीं और 12वीं की पढ़ाई बोर्डिंग स्कूल से पूरी की. बोर्डिंग स्कूल के अनुशासन ने उनके अंदर पढ़ाई के प्रति गंभीरता और समर्पण को और मजबूत किया.

कोटा से भोपाल तक की मेहनत और संघर्ष
डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने कोटा में एक साल तक कड़ी तैयारी की. इसके बाद भोपाल के एलेन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पूरा किया. मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें यह एहसास हुआ कि डॉक्टर बनना केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज सेवा का एक बड़ा माध्यम है.

स्पेशलाइजेशन में मिला सही मार्गदर्शन
आगे बढ़ते हुए उन्होंने 2022 में उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया. यहां उन्हें अनुभवी शिक्षकों और सहयोगी फैकल्टी का पूरा समर्थन मिला. पीजी के दौरान उन्होंने रेस्पिरेट्री विभाग में तीन महीने काम किया जहां एक्स-रे पढ़ना, ब्रोंकोस्कोपी देखना और मरीजों की गंभीर स्थितियों को समझना उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण अनुभव रहा. यही वह समय था जब उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई और उन्होंने पल्मोनोलॉजी के क्षेत्र में खुद को पूरी तरह स्थापित कर लिया.

निजी जिंदगी में भी मिला डॉक्टर परिवार का साथ
इसी दौरान उनकी मुलाकात उनके जीवनसाथी श्रद्धांश से हुई जो खुद भी डॉक्टर हैं और वर्तमान में सतना मेडिकल कॉलेज में सेवाएं दे रहे हैं. हाल ही में दोनों की शादी हुई है और अब कीर्ति सतना में रहकर अपनी सेवाएं दे रही हैं. खास बात ये कि उनके ससुराल पक्ष में लगभग सभी सदस्य डॉक्टर हैं, जिससे उन्हें पेशेवर और पारिवारिक दोनों स्तर पर मजबूत सहयोग मिलता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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