20 हजार का निवेश, एक लाख तक की कमाई, 60 दिनों में अमीर बना देगी ये ‘जादुई’ फसल!

20 हजार का निवेश, एक लाख तक की कमाई, 60 दिनों में अमीर बना देगी ये ‘जादुई’ फसल!


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हल्की दोमट मिट्टी में उन्नत बीजों की बुवाई से लौकी का बेहतर उत्पादन मिलता है. इसमें प्रति हेक्टेयर 4-5 किलो बीज पर्याप्त है. सही जल निकासी और मचान विधि अपनाने पर 25-30 टन उत्पादन संभव है, जिससे किसान करीब एक लाख रुपए तक कमा सकते हैं.

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इन दिनों हरी सब्जियों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का मजबूत जरिया बनती जा रही हैं. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में लौकी की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. मार्च माह में इसकी बुवाई करने पर फसल तेजी से बढ़ती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों को बेहतर आमदनी होती है. गर्मी के दिनों में लौकी की मांग बढ़ जाती है, जिससे यह फसल कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाला विकल्प बनकर उभर रही है.

गर्मियों के सीजन में लौकी की खेती होती है लाभकारी
कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मियों के सीजन में लौकी की खेती बेहद लाभकारी होती है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह गहरी जुताई करें और उसके बाद बेड विधि अपनाएं. इस विधि में ऊंची मेड़ बनाकर बीज बोए जाते हैं, जिससे फल जमीन के सीधे संपर्क में नहीं आते और सड़ने की समस्या कम हो जाती है. साथ ही सिंचाई भी आसान होती है और पानी की बचत होती है.

कीटों से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव जरूरी
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को जैविक तरीके से खेती पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. खेत में वर्मी कंपोस्ट या अन्य जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. बाजार में जैविक तरीके से उगाई गई सब्जियों की मांग अधिक होती है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं. इसके अलावा फसल को रोगों और कीटों से बचाने के लिए समय-समय पर उचित दवाओं का छिड़काव करना भी जरूरी है.

बीज का चुनाव भी होता है अहम
अच्छी पैदावार के लिए बीज का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार किसान फरीदा, वीएनआर और शिवानी जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर मिलते हैं. यदि किसान लंबी और आकर्षक लौकी उगाना चाहते हैं, तो मचान विधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है. इसमें बेल को ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे लौकी को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और उसका आकार भी बेहतर होता है.

किसानों के लिए फायदे का सौदा है लौकी की खेती
मुनाफे के लिहाज से भी लौकी की खेती काफी लाभदायक है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्टेयर लगभग 20 हजार रुपए की लागत आती है, जबकि फसल 55 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है. गर्मियों में बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों अच्छी रहती हैं, जिससे किसान आसानी से एक लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं. कम समय, कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण लौकी की खेती विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनती जा रही है.



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