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Balaghat Wildlife News: बालाघाट के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में गौरा नाम की बाघिन चर्चा में रहती है. उसके चार शावक हैं. एक शावक के साथ लापता हुई गौरा के तीन शावक अब जंगल में अपनी मां की तलाश कर रहे हैं. वीडियों में तीनों शावक बेहद नाजुक हालत में नजर आ रहे हैं. जानें पूरा मामला…
Balaghat News: बालाघाट में बीते कुछ सालों से वन्य प्राणियों के जीवन पर संकट नजर आ रहा है. बीते एक साल में जिले भर से अलग-अलग जगहों से वन्य प्राणियों के मौत की कई खबर सामने आई हैं. कभी बाघ तो कभी तेंदुआ मारा जाता है. इन्हीं में से एक है सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व, जहां पर बीते साल रहस्यमयी तरीके से बाघ की मौत हुई थी, जिसका अब तक खुलासा भी नहीं हुआ. अब एक बाघिन के लापता होने की खबर सुर्खियों में है. दरअसल, गौरा नाम की बाघिन अपने एक शावक के साथ लापता है. वहीं, दूसरी तरफ उसके तीन शावक मां की तलाश में जंगल में भटक रहे हैं. ऐसे में पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर चिंता जाहिर की है.
वीडियो से मचा हड़कंप
बालाघाट के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में गौरा नाम की बाघिन चर्चा में रहती है. उसके चार शावक हैं. एक शावक के साथ लापता हुई गौरा के तीन शावक अब जंगल में मां की तलाश कर रहे हैं. वीडियों में तीनों शावक बेहद नाजुक हालत में नजर आ रहे हैं. सभी शावकों की उम्र करीब 6 से 7 महीने ही है. बता दें कि सोनवानी का यह इलाका बाघों के बढ़ते कुनबे के कारण चर्चा में था. गौरा और उसके चार शावकों के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते थे, जिन्हें देख वन्यजीव प्रेमी गदगद रहते थे. लेकिन, पिछले कुछ दिनों से जंगल में छाई खामोशी ने आने वाले भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है.
वन विभाग की बढ़ी जिम्मेदारी
कमजोर हो रहे नन्हें शावक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस उम्र में शावकों की पूरी निर्भरता उनकी मां पर होती है. वह शिकार करना नहीं जानते हैं. ऐसे में उन्हें भोजन न मिलने से उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. कुपोषण का शिकार हो रहे नन्हे शावकों की जान जोखिम में है. ऐसे में वन विभाग पर न सिर्फ गौरा, उसके एक शावक को खोजने की जिम्मेदारी है, बल्कि इन शावकों की फीडिंग का भी भार है.
अनहोनी की आशंका
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट सिकंदर मिश्रा ने गौरा और उसके शावक के लापता होने पर सवाल खड़े करते हुए आशंका जाहिर की है. उनका दावा है कि गौरा करीब डेढ़ महीने से लापता है. क्या गौरा शिकारियों का निशाना बनी? या फिर वह फूड पॉइजनिंग जैसी किसी गंभीर स्थिति का शिकार हुई? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब तक वन विभाग के पास नहीं है. वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट शिकंदर मिश्रा और अन्य वन्यजीव प्रेमियों ने वन विभाग की मॉनिटरिंग प्रणाली पर कड़े सवालिया निशान खड़े किए हैं. जानकारों का कहना है कि जिस बाघिन के कुनबे को बढ़ता देख विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा था, उसकी सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
अब खोजबीन कर रहा प्रशासन
इस मामले में एसडीओ विनीता फुलबेल का कहना है कि बाघिन गौरा लापता है ऐसा कह नहीं सकते हैं. लेकिन, दूसरी तरफ गौरा को खोजने के लिए दो टीमें लगी हैं. जंगलों में सर्चिंग की जा रही है. साथ ही ट्रैप कैमरा भी लगाए गए हैं.
इससे पहले भी हो चुकी अनहोनी
करीब 7 महीने पहले भी इसी इलाके से रहस्यमयी तरीके से बाघ की जली हुई लाश का मामला सामने आया था. इसमें अब तक खुलासा नहीं हो सका की बाघ की मौत कैसे हुई और इसके आरोपी कौन थे. अब इस मामले के आने के बाद वन विभाग और उनकी कार्य प्रणाली घेरे में है. बालाघाट के लालबर्रा स्थित सोनवानी अभ्यारण्य को कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है. ऐसे में यहां पर वन्य प्राणी काफी संख्या में है. वहीं बाघों की संख्या भी बढ़ रही है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें