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Gangaur Folk Festival: निमाड़ के सबसे बड़े लोकपर्व गणगौर की शुरुआत माता की बाड़ी खुलने के साथ हो गई. करीब 40 डिग्री गर्मी के बीच भी महिलाएं नंगे पांव बाड़ी पहुंचीं और सिर पर रथ रखकर घर लौटीं. इस बार रनुबाई और धनियर राजा के रेडीमेड रथों का ट्रेंड भी खास आकर्षण का केंद्र बना.
निमाड़ के सबसे बड़े लोकपर्व गणगौर की विधिवत शुरुआत शनिवार को माता की बाड़ी खुलने के साथ हो गई. खरगोन में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाड़ी पूजने पहुंचे. दोपहर तक महिलाएं माता रूपी ज्वारों को सुसज्जित रथों में बैठाकर अपने घर लेकर आईं. पूरे क्षेत्र में पर्व की खास रौनक दिखाई दी.
करीब 40 डिग्री तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई. तेज धूप और गर्मी के बीच महिलाएं नंगे पांव माता की बाड़ी तक पहुंचीं. इसके बाद सिर पर रथ रखकर पैदल घर लौटीं. श्रद्धा और परंपरा का यह दृश्य लोगों को हैरान कर रहा था. कई रथों में सजी मूर्तियां इतनी जीवंत नजर आईं कि देखने वालों को लगा जैसे उनमें जान आ गई हो.
इस बार गणगौर पर्व में रेडीमेड रथों का ट्रेंड खास तौर पर देखने को मिला. पहले जहां अधिकतर लोग घर पर बांस की लकड़ियों से रथ बनाते थे. वहीं, अब बाजार से सजे-धजे रथ खरीदने का चलन बढ़ा है. श्रद्धालु संदीप हिरवे ने बताया कि उन्होंने महेश्वर से करीब 6 हजार रुपए में माता का रथ खरीदा. यह रथ देखने में सुंदर होते हैं और इन्हें सजाने में भी कम समय लगता है और सजाने की जरूरत नहीं पड़ती.
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हालांकि, कई श्रद्धालुओं ने इस बार भी परंपरा को बनाए रखते हुए घर पर ही खास तरीके से रथ तैयार किए. किसी रथ में रनुबाई की गोद में बच्चा नजर आया तो किसी रथ में उनके हाथ में गुलाब रखा गया. कई रथों में अलग-अलग तरह की साज-सज्जा लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही.
कई रथों में रनुबाई को सोने-चांदी और हीरे-मोती जैसे आभूषणों से सजाया गया था. उनकी पोशाक भी आकर्षक रही. उनकी पोशाक भी खास रही. सजे हुए रथों को देखने के लिए मोहल्लों में लोगों की भीड़ लगी रही और श्रद्धालु इनकी तस्वीरें लेते नजर आए.
रनुबाई के साथ धनियर राजा के रथ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने. भक्त दिनेश पगारे ने धनियर राजा को नीला कोर्ट पहनाकर सजाया. सिर पर साफा और पगड़ी के साथ हाथों में तलवार दिखाई गई. वहीं एक श्रद्धालु ने झूले में रनुबाई और धनियर राजा को विराजित किया.
खरगोन सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र में चैत्र नवरात्रि की तृतीय तिथि से पंचमी तक गणगौर पर्व की खास रौनक रहती है. इन तीन दिनों में श्रद्धालु भगवान शिव को धनियर राजा और माता पार्वती को रनुबाई के रूप में पूजते हैं. इस दौरान महिलाएं निमाड़ी बोली में झालरिया गाकर देवी को प्रसन्न करती हैं.
लोक मान्यता के अनुसार विवाह के बाद जब बेटी पहली बार मायके आती है तो उसकी विशेष सेवा की जाती है. इसी तरह गणगौर पर्व में रनुबाई को बेटी और धनियर राजा को दामाद मानकर उनकी पूजा होती है. तृतीया को घर लाने के बाद शाम को आंगन में बैठाकर झालरिया गाई गईं और रविवार शाम नर्मदा तट पर पानी पिलाने की रस्म निभाई जाएगी, जिसे रथ बोडाना कहा जाता है. सोमवार को ज्वारों के विसर्जन के साथ पर्व का समापन होगा.