छतरपुर के जवाहर रोड स्थित मां खेरे की देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यह मंदिर शहर की प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल है और स्थानीय स्तर पर इसे चार प्रमुख सिद्धपीठों में एक माना जाता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा करीब 300 वर्ष पुरानी मानी जाती है। बताया जाता है कि इसकी स्थापना बुंदेलखंड के शासक महाराजा छत्रसाल ने अपने गुरु के मार्गदर्शन में कराई थी। मंदिर परिसर में काल भैरव, बटुक भैरव और सूर्य भगवान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। नवरात्रि में विशेष पूजा-अर्चना होती है
नवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही मंदिर में लंबी कतारें देखी जा रही हैं। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित की जा रही है, जो पूरे नौ दिनों तक जलती रहती है। भक्त पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पहुंचकर परिवार की सुख-समृद्धि और कुशलता की कामना करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं को विशेष महत्व दिया जाता है। माता के अलग-अलग श्रृंगार आकर्षण का केंद्र
मंदिर में प्रतिदिन माता के विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। श्रद्धालु इन अलग-अलग रूपों के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। स्थानीय परंपरा के तहत विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं। वहीं, बच्चे के जन्म के बाद भी परिवारजन मंदिर पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मंदिर के पुजारी मुन्ना महाराज के अनुसार, नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन वर्षों से होते आ रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। बुंदेलखंड की संस्कृति से जुड़ा है यह स्थान
मां खेरे की देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली भीड़ स्थानीय लोकविश्वास और परंपराओं की निरंतरता को दर्शाती है।
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