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Youngest captains in Test: टाइगर पटौदी से राशिद खान तक. टेस्ट इतिहास के ये हैं वो 5 जांबाज जिन्होंने उम्र के हर गणित को मात दी. महज 20-21 की उम्र में जब खिलाड़ी टीम में जगह बनाने को तरसते हैं, तब इन ‘वंडर किड्स’ ने कप्तानी का कांटों भरा ताज पहनकर दुनिया को घुटनों पर ला दिया. नवाब पटौदी के नवाबी तेवर से लेकर अफगानी जादूगर राशिद के रिकॉर्ड तक. ये है इन 5 सबसे युवा सेनापतियों की अनसुनी दास्तां.
टेस्ट क्रिकेट के पांच सबसे युवा कप्तान.
नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में कप्तानी को अक्सर अनुभव और परिपक्वता का पर्याय माना गया है. मैदान पर 11 खिलाड़ियों को दिशा देना और दबाव के क्षणों में सही निर्णय लेना किसी नौजवान के लिए ‘कांटों के ताज’ जैसा होता है. लेकिन इतिहास गवाह है कि कुछ ऐसे ‘वंडर किड्स’ भी हुए जिन्होंने उम्र की सीमाओं को लांघकर बेहद कम उम्र में अपनी टीम की कमान संभाली. टेस्ट के पांच सबसे युवा कप्तानों की कहानी यह साबित करती है कि कप्तानी केवल उम्र का खेल नहीं, बल्कि दृष्टिकोण और साहस का मेल है. जहां राशिद खान ने अपनी फिरकी से नेतृत्व को नई ऊंचाई दी, वहीं ग्रीम स्मिथ और टाइगर पटौदी ने अपने नेतृत्व से अपनी नेशनल टीम के डीएनए को हमेशा के लिए बदल दिया. ये आंकड़े महज रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि उन युवाओं की मिसाल हैं जिन्होंने दुनिया को बताया कि यदि प्रतिभा और संकल्प हो, तो उम्र का फासला कभी आड़े नहीं आता.
इस लिस्ट में अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान (Rashid Khan) पहले नंबर पर हैं. साल 2019 में जब उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव (अब चट्टोग्राम) के मैदान पर टॉस के लिए कदम रखा, तो उन्होंने 15 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था. राशिद न केवल सबसे युवा कप्तान बने, बल्कि उन्होंने अपनी कप्तानी के डेब्यू मैच में ही 11 विकेट लेकर टीम को ऐतिहासिक जीत भी दिलाई. राशिद खान जब अफगानिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने उस समय वह 20 साल और 350 दिन के थे. राशिद से पहले यह रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के विकेटकीपर बल्लेबाज ततेंदा ताइबू (20 साल 358 दिन ) के नाम था. 2004 में श्रीलंका के खिलाफ हरारे में जब ताइबू कप्तान बने, तब जिम्बाब्वे क्रिकेट संकट के दौर से गुजर रहा था. सीनियर खिलाड़ियों के विद्रोह के बीच इस युवा खिलाड़ी ने जिम्मेदारी उठाई और खेल के प्रति अपनी गजब की प्रतिबद्धता दिखाई.
टेस्ट क्रिकेट के पांच सबसे युवा कप्तान.
भारतीय क्रिकेट की नई सुबह नवाब ऑफ पटौदी जूनियर
भारत के मंसूर अली खान पटौदी, जिन्हें दुनिया ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से जानती है. उनका नाम इस लिस्ट में सबसे गौरवशाली है. 1962 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिजटाउन में जब कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर चोटिल हुए, तब पटौदी को कमान सौंपी गई. जब पटौदी को टीम की कमान सौंपर गई तब उनकी उम्र 21 साल 77 दिन थी.एक आंख की रोशनी खोने के बावजूद उन्होंने जिस निडरता से कप्तानी की, उसने भारतीय क्रिकेट को ‘जीतने का जज्बा’ सिखाया.
पाकिस्तान का ‘ब्यूरो ऑफ स्विंग’वकार यूनिस
पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने 1993 में जिम्बाब्वे के खिलाफ कराची में पहली बार कप्तानी की. रिवर्स स्विंग के सुल्तान कहे जाने वाले वकार उस समय दुनिया के सबसे घातक गेंदबाजों में से एक थे. कप्तानी ने उनके आक्रामक खेल में और धार पैदा की, जिसका असर मैदान पर साफ दिखता था. वकार को 22 साल 15 दिन की उम्र में पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट टीम की कप्तानी मिली.
दक्षिण अफ्रीका का सबसे सफल नेतृत्व (22 साल, 82 दिन)
दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ ने 2003 में बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव में कमान संभाली. स्मिथ का नाम इसलिए खास है क्योंकि वे न केवल युवा कप्तान बने, बल्कि उन्होंने 100 से अधिक टेस्ट मैचों में कप्तानी करने का विश्व रिकॉर्ड भी बनाया.उनकी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका दुनिया की नंबर-1 टेस्ट टीम बनी. स्मिथ जब टेस्ट कैप्टन बने तब उनकी उम्र 22 साल 82 दिन थी.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें