नरसिंहपुर कांग्रेस विवाद पर मंत्री उदयप्रताप सिंह का तंज: बोले-नेतृत्व के आचरण का परिणाम; ऊपर से नीचे तक असर – Narsinghpur News

नरसिंहपुर कांग्रेस विवाद पर मंत्री उदयप्रताप सिंह का तंज:  बोले-नेतृत्व के आचरण का परिणाम; ऊपर से नीचे तक असर – Narsinghpur News




नरसिंहपुर में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित रानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस कार्यक्रम में हुई झड़प अब राजनीतिक रंग ले रही है। घटना पर प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदयप्रताप सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंत्री उदयप्रताप सिंह ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में आचरण ऊपर से नीचे तक आता है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी दल के नेता का व्यवहार उसके कार्यकर्ताओं तक पहुंचता है, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का आचरण ही मर्यादित नहीं है। मंत्री बोले-नेताओं के आचरण का असर कार्यकर्ताओं पर पड़ता उन्होंने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब नेता स्वयं सदन में अमर्यादित भाषा और व्यवहार करते हैं, तो उसका असर पूरे देश में जाता है और कार्यकर्ता भी उसी का अनुसरण करते हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता और देश की जनता ऐसे व्यवहार से दुखी हैं। मंत्री ने कांग्रेस के ऐतिहासिक नेतृत्व जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े राजनीतिक परिवार की अगली पीढ़ी से इस तरह के आचरण की अपेक्षा नहीं थी। महिला नेतृत्व के सामने कार्यकर्ताओं की झड़प उन्होंने नरसिंहपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब एक महिला को जिला अध्यक्ष बनाया गया है, तो कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे मर्यादा का पालन करें। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान महिला नेतृत्व के सामने ही कार्यकर्ताओं का आपस में भिड़ जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि नरसिंहपुर जैसे जिले में दलों के बीच भी सौहार्दपूर्ण राजनीति की परंपरा रही है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर ही इस तरह का विवाद होना चिंताजनक है। मंत्री बोले-कांग्रेस के लिए अशुभ संकेत उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के भीतर इस तरह की स्थिति पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है। यह उसी दिशा में एक कदम है, जिसकी कल्पना खुद राहुल गांधी ने कांग्रेस मुक्त भारत के रूप में की थी। गौरतलब है कि शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नकुलनाथ मौजूद रहे, और उनके मंच से उतरते ही कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हो गया था, जो अब थाने तक पहुंच चुका है।



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