Certified Used Car Buying Guide: पुरानी कार खरीदने में धोखा होने का डर कई लोगों को नई गाड़ी की तरफ धकेल देता है, लेकिन आज के समय में सर्टिफाइड प्री-ओन्ड या सर्टिफाइड यूज्ड कारें खरीदना एकदम सुरक्षित और समझदारी भरा विकल्प बन गया है. ये गाड़ियां कार कंपनियों या उनके अधिकृत डीलरों द्वारा बेची जाती हैं, जहां हर कार को सख्त जांच के बाद ही बिक्री के लिए तैयार किया जाता है.
भारत में मारुति सुजुकी ट्रू वैल्यू, महिंद्रा फर्स्ट चॉइस, टाटा मोटर्स अस्योर्ड जैसी कई कंपनियां ऐसी सर्टिफाइड कारें उपलब्ध कराती हैं. इनमें 100 से 200 पॉइंट्स तक की जांच होती है, जिसमें इंजन, चेसिस, ब्रेक, सस्पेंशन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और बॉडी की पूरी डिटेल चेक की जाती है. साथ ही, ये कारें वारंटी के साथ आती हैं. कभी 1 साल, कभी 2 साल तक, जो सामान्य सेकंड-हैंड कार में नहीं मिलती है.
पुराने दाम में नई जैसी फीलिंग!
इससे खरीदार को नई जैसी फीलिंग मिलती है, क्योंकि कार पहले से रिपेयर की जाती है, क्लीन की जाती है और कई बार नए पार्ट्स भी लगाए जाते हैं. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि पुरानी कार में छिपे दोष निकल आएंगे, लेकिन सर्टिफाइड प्रोग्राम में कंपनी खुद बैक करती है. अगर कोई समस्या आती है, तो वारंटी के तहत फ्री रिपेयर मिलता है.
साथ ही, कई बार गारंटीड बायबैक ऑप्शन भी होता है, मतलब कुछ समय बाद कंपनी खुद कार वापस खरीद लेती है, जिससे रिसेल वैल्यू की चिंता कम हो जाती है. भारत में यूज्ड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और सर्टिफाइड कारें इसी वजह से लोकप्रिय हो रही हैं, क्योंकि ये ट्रांसपेरेंट होती हैं, पेपरवर्क सही होता है और धोखाधड़ी का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.
सर्टिफाइड पुरानी कारें ही क्यों?
अब बात करते हैं कि सर्टिफाइड पुरानी कारें क्यों चुनें और इनके फायदे क्या हैं. सबसे पहले कीमत का फायदा. नई कार खरीदने पर डेप्रिसिएशन बहुत तेजी से होता है. पहली 2-3 साल में कार की वैल्यू 30-50% तक गिर जाती है. लेकिन सर्टिफाइड यूज्ड कार में ये डेप्रिसिएशन पहले ही हो चुका होता है, इसलिए आप कम पैसे में बेहतर मॉडल या ज्यादा फीचर्स वाली कार ले सकते हैं. उदाहरण के लिए, जो नई कार 10-12 लाख में मिलती है, वही 3-4 साल पुरानी सर्टिफाइड कंडीशन में 6-8 लाख में मिल सकती है.
धोखाधड़ी की नो टेंशन
सामान्य सेकंड-हैंड कार खरीदते समय प्राइवेट सेलर या छोटे डीलर से धोखा हो सकता है. जैसे एक्सीडेंट हिस्ट्री छिपाना, ओडोमीटर टैम्परिंग या मैकेनिकल इश्यू छिपाना. लेकिन सर्टिफाइड कारों में कंपनी की टीम 150-200 पॉइंट चेक करती है. मारुति ट्रू वैल्यू में 376 पॉइंट चेकलिस्ट है, महिंद्रा फर्स्ट चॉइस में 200+ पॉइंट्स और टाटा अस्योर्ड में भी सख्त जांच होती है. अगर कोई पार्ट खराब है, तो उसे रिप्लेस किया जाता है. कार को क्लीन, डिटेलिंग और पेंट करवाया जाता है, जिससे बाहर से नई जैसी लगती है.
वारंटी का सुकून
ज्यादातर सर्टिफाइड कारें 1 से 2 साल की वारंटी के साथ आती हैं, जिसमें इंजन, गियरबॉक्स, सस्पेंशन जैसे बड़े पार्ट्स कवर होते हैं. महिंद्रा फर्स्ट चॉइस 2 साल की सबसे व्यापक वारंटी देती है. साथ ही फ्री सर्विस या कुछ फ्री लेबर भी मिलता है. अगर वारंटी पीरियड में कोई खराबी आती है, तो कंपनी फ्री में ठीक करवाती है. ये नई कार जैसा ही फील देता है.
फाइनेंस और पेपरवर्क
ये कारें बैंक लोन पर आसानी से मिलती हैं, क्योंकि कंपनी बैक करती है. इंश्योरेंस भी कम प्रीमियम पर मिल जाता है. पेपरवर्क जैसे RC ट्रांसफर, NOC, इंश्योरेंस ट्रांसफर सब कंपनी संभालती है, जिससे कोई कानूनी झंझट नहीं होता है. कई बार 5-डे रिटर्न पॉलिसी भी होती है. अगर कार पसंद न आए, तो रिटर्न कर सकते हैं.
रीसेल वैल्यू
रिसेल वैल्यू भी एक बड़ा प्वाइंट है. सर्टिफाइड कार होने से आगे बेचते समय ज्यादा कीमत मिलती है, क्योंकि खरीदार को पता होता है कि कार चेक हुई है. गारंटीड बायबैक ऑप्शन से तो कार बेचना और भी आसान हो जाता है.
हमारी सलाह: अगर आपका बजट सीमित है, लेकिन नई जैसी रिलायबल कार चाहिए, तो सर्टिफाइड पुरानी कार सबसे बेस्ट ऑप्शन है. धोखे का डर बिल्कुल न लें, क्योंकि अच्छी कंपनियां ऐसा नहीं ही करती हैं. आज के समय में पुरानी कार खरीदना रिस्क नहीं, बल्कि स्मार्ट चॉइस है. बशर्ते आपने पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद गाड़ी खरीदी हो.