बैतूल के सोनाघाटी इलाके में रविवार को एक मादा चीतल के शावक की मौत हो गई। राहगीरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे कुछ आवारा कुत्तों को मृत चीतल को नोचते हुए देखा, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने इसकी जानकारी बन विभाग से साझा की। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। डिप्टी रेंजर जय टेकाम ने चीतल के शावक का रेस्क्यू किया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बताया गया कि आवारा कुत्तों ने उसे बुरी तरह नोच डाला था। बैतूल रेंज के रेंजर अनुनेद्र शुक्ला ने जानकारी दी कि मृत चीतल लगभग एक वर्ष की मादा थी। आशंका है कि वह अपने झुंड से बिछड़कर आबादी वाले क्षेत्र में आ गई थी। डिप्टी रेंजर टेकाम ने बताया कि आवारा कुत्तों ने उसे घेरकर हमला किया होगा, जिसके कारण उसकी मौत हुई। पिछले हिस्से में गंभीर चोट के निशान मिले
वन अधिकारियों के मुताबिक, चीतल के शरीर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जो कुत्तों के हमले की पुष्टि करते हैं। घटना स्थल जंगल से सटा हुआ है, जिससे यह संभावना प्रबल होती है कि शावक रास्ता भटक कर यहां आ गया था। मृत चीतल का पोस्टमार्टम पशु चिकित्सक डॉ. चंचल ने किया। पोस्टमार्टम के बाद, वन विभाग ने नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उल्लेखनीय है कि चीतल (स्पॉटेड डियर) भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एक संरक्षित प्रजाति है और इसे अनुसूची-3 में शामिल किया गया है। इस घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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