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Watermelon Trick: तरबूज पर बना पीला धब्बा उसकी पकावट का अहम संकेत होता है. यह धब्बा उस हिस्से पर बनता है, जहां तरबूज जमीन के संपर्क में रहता है और सूरज की रोशनी का असर पड़ता है. अगर यह धब्बा सुर्ख पीले रंग का है, तो समझिए कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ है.
सीधी. मध्य प्रदेश में जैसे-जैसे गर्मी का असर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे तरबूज की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है. सीधी जिले में इन दिनों बाजारों में बाहर से आने वाले तरबूजों की भरमार देखने को मिल रही है. यहां महाराष्ट्र, गुजरात और बेंगलुरु से बड़ी मात्रा में तरबूज पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार पूरी तरह सजा हुआ नजर आ रहा है. भीषण गर्मी के बीच यह फल लोगों के लिए राहत का बड़ा जरिया बन गया है क्योंकि यह शरीर को ठंडक देता है और पानी की कमी को भी काफी हद तक दूर करता है. सीधी शहर में पिछले पांच वर्षों से मौसमी फलों की बिक्री कर रहे रामलोटन साहू ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि तरबूज खरीदते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर बेहतरीन फल चुना जा सकता है. उनके अनुसार सबसे पहले तरबूज के आकार और वजन को देखना चाहिए. गोल आकार का तरबूज आमतौर पर ज्यादा अच्छा माना जाता है. साथ ही जो तरबूज अपने आकार के हिसाब से भारी होता है, वह अधिक रसदार और मीठा होता है. हल्का तरबूज अक्सर अंदर से अधपका या खराब निकल सकता है.
उन्होंने बताया कि तरबूज पर मौजूद पीला धब्बा उसकी पकावट का अहम संकेत होता है. यह धब्बा उस हिस्से पर बनता है, जहां तरबूज जमीन के संपर्क में रहता है और सूरज की रोशनी का असर पड़ता है. अगर यह धब्बा गहरे पीले रंग का है, तो समझिए कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ है और अंदर से लाल और मीठा होगा. वहीं अगर यह धब्बा हल्का या न के बराबर हो, तो तरबूज कच्चा भी हो सकता है. तरबूज के छिलके का रंग और बनावट भी उसकी गुणवत्ता को दर्शाते हैं. एक अच्छा तरबूज हमेशा एक समान रंग का और हल्का चमकदार होता है. यदि उसमें अलग-अलग रंग के धब्बे या असमानता नजर आए, तो यह संकेत हो सकता है कि वह अंदर से खराब हो. इसके अलावा छिलके पर बनी काली रेखाएं, जिन्हें ‘वेबिंग’ कहा जाता है, भी मिठास का संकेत देती हैं. यदि ये रेखाएं एक-दूसरे के करीब हों, तो तरबूज मीठा होने की संभावना ज्यादा होती है.
पके तरबूज की एक और पहचान
राम लोटन साहू का कहना है कि तरबूज खरीदते समय उसे हल्के से थपथपाकर भी जांचना चाहिए. अगर थपथपाने पर गूंजती हुई गहरी आवाज सुनाई दे, तो यह संकेत है कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ और रसदार है. वहीं यदि आवाज धीमी या भारी हो, तो तरबूज अंदर से कच्चा या सूखा हो सकता है. इन आसान और कारगर तरीकों को अपनाकर उपभोक्ता बिना काटे ही एक मीठा, रसीला और स्वादिष्ट तरबूज चुन सकते हैं. इससे न सिर्फ उनका पैसा सही जगह खर्च होगा बल्कि गर्मी के मौसम में स्वाद और सेहत दोनों का पूरा आनंद भी मिल सकेगा.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.