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Satna News: अगर कोई व्यक्ति पशुपालन विभाग में उप-संचालक बनना चाहता है, तो उसे एक तय प्रक्रिया से गुजरना होता है. सबसे पहले उसे NEET परीक्षा पास करनी होती है. इसके बाद उसे मान्यता प्राप्त कॉलेज से बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री की डिग्री हासिल करनी होती है.
सतना. मध्य प्रदेश समेत देशभर में इन दिनों पशुपालन और डेयरी सेक्टर में नौकरियों की बंपर संभावनाएं देखने को मिल रही हैं. सरकारी भर्तियों से लेकर रिसर्च और प्राइवेट सेक्टर तक इस फील्ड में युवाओं के लिए कई रास्ते खुले हैं. खास बात यह है कि अब यह क्षेत्र केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रोफेशनल करियर के रूप में तेजी से उभर रहा है. ऐसे में इस फील्ड में कदम रखने से पहले एक्सपर्ट की सलाह बेहद अहम हो जाती है. लोकल 18 से बातचीत में सतना के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप-संचालक डॉ एपी सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में आने के लिए सबसे पहले नीट परीक्षा पास करना जरूरी होता है. इसके बाद मेरिट के आधार पर कुछ छात्र मेडिकल में जाते हैं जबकि अन्य छात्र वेटरनरी की ओर रुख करते हैं. उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी छात्र का झुकाव पहले से ही पशुओं की सेवा और इस पेशे के प्रति है तो ही उसे इस फील्ड को चुनना चाहिए. कई बार छात्र मेडिकल में चयन न होने पर मजबूरी में वेटरनरी फील्ड चुन लेते हैं, जिससे उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती, इसलिए इस क्षेत्र में सफलता के लिए पशुओं के प्रति लगाव और समर्पण बेहद जरूरी है.
पशुपालन क्षेत्र में करियर केवल डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है. इसमें कई डायरेक्शन मौजूद हैं, जहां युवा अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं, जैसे कि पशुओं की बीमारियों पर रिसर्च, कम लागत में प्रभावी दवाइयों का विकास, एंटीबायोटिक्स के बेहतर उपयोग के तरीके और पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर काम करना जैसे कई रिसर्च फील्ड में जा सकते हैं. यह फील्ड रिसर्च के लिहाज से भी काफी व्यापक है और इसमें लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं. ऐसे में जो छात्र नवाचार और खोज में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह क्षेत्र बेहद आकर्षक साबित हो सकता है.
उप-संचालक बनने का पूरा प्रोसेस
उन्होंने कहा कि अगर कोई अभ्यर्थी पशुपालन विभाग में उप-संचालक बनना चाहता है, तो उसे एक तय प्रक्रिया से गुजरना होता है. सबसे पहले नीट परीक्षा पास करनी होती है, फिर मान्यता प्राप्त कॉलेज से बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री की डिग्री हासिल करनी होती है. इसके बाद राज्य लोक सेवा आयोग पीएससी की परीक्षा पास करनी होती है. चयन के बाद उम्मीदवार पशु चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्त होता है. आगे बेहतर कार्य प्रदर्शन और अच्छी सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर समय-समय पर प्रमोशन मिलते हैं और अंततः उप-संचालक के पद तक पहुंचा जा सकता है.
तैयारी का तरीका और सैलरी
डॉ एपी सिंह के अनुसार, पीएससी की तैयारी के लिए रोजाना 5-6 घंटे की पढ़ाई जरूरी है. यह परीक्षा प्रोफेशन वाइज होती है, जिसमें सामान्य ज्ञान के साथ-साथ अपने विषय की गहरी समझ होना बेहद जरूरी है. ऑब्जेक्टिव पैटर्न में सवाल आते हैं, इसलिए कॉन्सेप्ट क्लियर होना चाहिए. जहां तक सैलरी की बात है, तो उप-संचालक के पद पर पहुंचने के बाद डेढ़ लाख रुपये से 1.7 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है. यही कारण है कि अब यह फील्ड युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.