पन्ना जिले की ‘मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना’ अब विकास और आदिवासियों के हक की लड़ाई के बीच बड़े टकराव का मुद्दा बन गई है। 23 मार्च को शहीद दिवस के मौके पर बनगांय टपरिया में सैकड़ों आदिवासियों और किसान महिलाओं ने सांकेतिक फांसी लगाकर अपना कड़ा विरोध जताया। इस प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित किसानों ने अपने खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले हुए इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को चेतावनी दी कि बिना किसानों की मर्जी और कानूनी प्रक्रिया के एक इंच जमीन भी नहीं लेने दी जाएगी। उन्होंने खड़ी फसलों पर जेसीबी चलाने को अमानवीय बताया और 5 लाख रुपए के पुनर्वास पैकेज को नाकाफी करार दिया। ग्रामीणों में दहशत और बेबसी का माहौल प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा। मंगल यादव ने आरोप लगाया कि आरटीआई लगाने के बाद भी उन्हें प्रोजेक्ट की जानकारी नहीं दी जा रही है। वहीं, आसाराम आदिवासी ने बताया कि गांव में भारी पुलिस बल तैनात होने से लोग दहशत में हैं और रात भर सो नहीं पा रहे हैं। अजयगढ़ छावनी में तब्दील, धारा 163 लागू आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। जिला कलेक्ट्रेट में धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर दी गई है। अजयगढ़ तहसील को भारी पुलिस बल तैनात कर छावनी बना दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की इस घेराबंदी को दमनकारी नीति बताया है। राष्ट्रीय मुद्दा बनने की ओर बढ़ता आंदोलन जिस तरह से महिलाओं और किसानों ने खून से पत्र लिखकर विरोध जताया है, उससे साफ है कि यह मुद्दा अब बड़ा रूप ले चुका है। जानकारों का मानना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही बातचीत और पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो यह स्थानीय विरोध दिल्ली तक गूंज सकता है।
Source link