बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के हीरापुर-2 गांव के किसान दिलीप मंडल ने बंजर और बिना पानी की सुविधा वाली जमीन को उपजाऊ और सिंचित बना कर हरा-भरा कर दिया है। वे बीते 5 सालों से धान की फसल निकालने के बाद यहां तरबूज की खेती कर चार माह में 3 से 6 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं। किसान दिलीप मंडल ने बताया कि मैं अभी तरबूज लगा रहा हूं। इस जमीन पर 10 साल पहले कंटीली झाड़ियां थीं। जमीन भी समतल नहीं थी, बमुश्किल बरसात की फसल लेते थे। लोग तवा नदी में तरबूज लगाते थे। धीरे-धीरे नदी में रेत घटने से लोग खेतों में तरबूज लगाने लगे। हमने भी खेत को समतल कर यहां निजी तालाब बनाकर तरबूज और रबी फसल लगाना शुरू किया। वर्तमान में 5 एकड में तरबूज लगा है जो 15 मार्च के बाद बाजार में आ जाएगा। बता दें, बंगाली समाज को बसाने के लिए यहां पुनर्वास क्षेत्र हीरापुर 2 बनाया गया था। ढाई लाख का खर्च, बचत 4 लाख तक 5 एकड़ में 2 किलो बीज डाला है। फसल तैयार होने तक लगभग ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। 3 से 4 माह में तरबूज निकल जाता है। खेत से ही फसल बेच लेते हैं। प्रति एकड़ 10 टन से 25 टन तक फसल निकल आती है। रेट 10 से 20 रुपए किलो के बीच मिलता है। तरबूज कोलकाता समेत देश के कई हिस्सों में सप्लाई होता है। अभी 3 किलो वजन का तरबूज है, जो 7 किलो तक का हो जाता है। गत वर्ष 3 लाख 75 हजार रुपए की बचत थी। किसान ने इस खास तकनीक से की खेती अब जानिए 5 एकड़ जमीन में खेती का गणित पांच एकड़ जमीन में दो किलो बीच लगता है। वर्तमान में कलिया गोल्ड और करन वैरायटी का बीज लगाया है। जिसकी कीमत 32 हजार रुपए किलो है।
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