Expose: भोपाल के खेतों में जहर! गंदे पानी से सिंचाई, थाली तक पहुंच रहा कैंसर

Expose: भोपाल के खेतों में जहर! गंदे पानी से सिंचाई, थाली तक पहुंच रहा कैंसर


भोपाल. देश की सबसे स्वच्छ राजधानी कहे जाने वाले भोपाल से एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है. शहर के आसपास के इलाकों में खेतों की हरियाली के पीछे एक खतरनाक खेल चल रहा है. नालों के गंदे पानी यानी सीवेज से सब्जियों की सिंचाई की जा रही है. पहली नजर में ये खेत उपजाऊ और हरे-भरे दिखाई देते हैं, लेकिन हकीकत में यह सीधे लोगों की थाली तक जहर पहुंचाने जैसा है. इस एक्सपोज में सामने आया कि बिना ट्रीटमेंट के गंदे पानी का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.

यह मामला केवल खेती का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा संकट बनता जा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसे पानी से उगाई गई सब्जियों का सेवन करने से शरीर में धीरे-धीरे जहरीले तत्व जमा होते हैं. इससे कैंसर, किडनी और लीवर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. सबसे हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की जानकारी के बावजूद जमीनी स्तर पर इस पर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती.

नाले का पानी सीधे खेतों तक
भोपाल के भानपुर क्षेत्र के पास बहने वाले पातरा नाले के किनारे बड़े पैमाने पर सीवेज से खेती की जा रही है. मोटर पंप लगाकर गंदे पानी को सीधे खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. यह पानी बिना किसी शुद्धिकरण के सब्जियों और फसलों में इस्तेमाल हो रहा है.

हरियाली के पीछे छिपा जहर
खेतों में उगाई जा रही सब्जियां देखने में ताजी और हरी दिखती हैं. लेकिन इनमें मौजूद भारी धातुएं और जहरीले रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं. पालक, मेथी, गोभी जैसी सब्जियां इस पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.

प्रशासन का दावा और जमीनी हकीकत
प्रशासन का कहना है कि केवल ट्रीटेड वाटर से ही खेती की अनुमति दी गई है. कलेक्टर ने भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही है. लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के उलट नजर आती है. खुलेआम नालों से पानी खींचा जा रहा है.

क्यों मजबूर हैं किसान?
कई किसान पानी की कमी और संसाधनों की कमी के कारण सीवेज का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह पानी आसानी से उपलब्ध होता है और फसल जल्दी बढ़ती है. इससे उन्हें आर्थिक फायदा दिखता है, लेकिन यह फायदा लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है.

स्वास्थ्य पर क्‍या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पानी से उगी सब्जियों में बैक्टीरिया, वायरस और केमिकल मौजूद होते हैं. इनके सेवन से पेट की बीमारियां, स्किन इंफेक्शन, किडनी डैमेज और कैंसर तक का खतरा हो सकता है. नालों से पानी खींचने के लिए कई जगह अवैध मोटर पंप लगाए गए हैं. प्रशासन की निगरानी कमजोर होने से यह समस्या बढ़ती जा रही है.

समाधान क्या है?
इस समस्या से निपटने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की संख्या बढ़ाना जरूरी है. किसानों को साफ पानी उपलब्ध कराना होगा. साथ ही अवैध सिंचाई पर सख्त कार्रवाई करनी होगी. जागरूकता भी जरूरी है.



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