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केंद्र और प्रदेश की सरकारें कई महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना चलाकर लोगों को इसका सीधा लाभ देना चाहती हैं, लेकिन कुछ लापरवाह और गैर जिम्मेदार अधिकारी ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं को पलीता लगाते दिख रहे हैं. अब मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में तालाब बनाने में ही गड़बड़ी पाई गई है.
रायसेन जिले में कागजों में ही बना तालाब
Raisen News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में भ्रष्टाचार का अनोखा मामला सामने आया है, जहां कागजों में तो तालाब बने हुए हैं, लेकिन खेतों से गायब हैं. यह सब स्थानीय अधिकारियों की बगैर मिली भगत के भला कैसे हो सकता है? रायसेन जिले में जल गंगा संवर्धन योजना के तहत किसानों के खेतों में तालाब का निर्माण कराया जाना था, जहां भ्रष्टाचारियों द्वारा ऐसा खेल खेला गया कि पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं.
रायसेन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 30 मार्च से 30 जून 2025 के तहत 2500 से अधिक खेत तालाबों का निर्माण कराया गया. इन तालाबों के साथ ही 23 अमृत सरोवर और 1600 से अधिक कूप सिंचाई पिट भी बनाए गए हैं, जिससे 5000 एकड़ से अधिक भूमि में सच्चाई सुविधा बेहतर होने का दावा किया गया था. जल गंगा संवर्धन योजना के तहत जिले में 1069 तालाबों के निर्माण का लक्ष्य था, लेकिन स्वीकृति लक्ष्य के मुकाबले 2500 से अधिक तालाबों का निर्माण किया गया.
कागजों में ही बनाए गए 6 तालाब
जिले में भ्रष्टाचार के काले खेल की बानगी बाड़ी जनपद पंचायत में देखने को मिली, जहां ग्राम पंचायत उटिया कला में जल गंगा संवर्धन योजना के तहत कागजों में ही 6 तालाब बना दिए गए और मौके पर खेत में कोई तालाब ही नहीं बने. ग्रामीण किसानों ने बताया की जांच के लिए मौके पर अधिकारी आए. उन्होंने किसानों से कोरे कागज पर ही साइन करा लिए.अब यह भ्रष्टाचार वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है?
जिला पंचायत CEO ने कार्रवाई करने की बात कही
इस पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा है कि किसी भी दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. वित्तीय अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जो भी कर्मचारी हैं वह शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को अगर ऐसे पलीता लगाते हैं, तो उन पर आगे भी ठोस कार्रवाई की जाएगी. पहले भी लापरवाही पर कार्रवाई की गई है.