गांव की मिट्टी से बना पहलवान; कई मेडल जीत चुके उदित, अब ओलंपिक गोल्ड का सपना

गांव की मिट्टी से बना पहलवान; कई मेडल जीत चुके उदित, अब ओलंपिक गोल्ड का सपना


Last Updated:

Khandwa News: शुरुआत में उदित पटेल को गांव के जगदीश काका और उनके गुरु रघुनाथ पंजारे (रघु काका) ने कुश्ती की बारीकियां सिखाईं. उनकी मेहनत और मार्गदर्शन ने उदित की नींव को मजबूती दी. बाद में उदित का चयन भोपाल की एकेडमी में हुआ, जहां वह प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहे हैं.

खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोटे से गांव बोरगांव खुर्द की मिट्टी ने एक ऐसा पहलवान तैयार किया है, जो आज देश-विदेश में अपने हुनर का लोहा मनवा रहा है. यह कहानी है युवा पहलवान उदित पटेल की, जिन्होंने छोटी उम्र से कुश्ती शुरू कर अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना देखा है. बोरगांव खुर्द कोई साधारण गांव नहीं है बल्कि इसे ‘पहलवानों का गढ़’ कहा जाता है. करीब 4000 की आबादी वाले इस गांव ने अब तक 200 से ज्यादा पहलवान देश को दिए हैं. खास बात यह है कि यहां लड़के ही नहीं लड़कियां भी कुश्ती में आगे हैं और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रही हैं.

इसी गांव के रहने वाले उदित पटेल ने महज 12 साल की उम्र में कुश्ती की शुरुआत की. गांव के अखाड़े की मिट्टी में दांव-पेंच सीखते-सीखते उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली. उनके पिता प्रकाश पटेल पेशे से किसान हैं लेकिन उन्होंने हमेशा बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और कभी भी खेल के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दी. शुरुआत में उदित को गांव के जगदीश काका और उनके गुरु रघुनाथ पंजारे (रघु काका) ने कुश्ती की बारीकियां सिखाईं. उनकी मेहनत और मार्गदर्शन ने उदित की नींव मजबूत की. बाद में उनका चयन भोपाल की एकेडमी में हुआ, जहां वह साल 2014 से प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहे हैं. उदित अब तक नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई मेडल जीत चुके हैं. वह खेलो इंडिया, स्कूल नेशनल, जूनियर और सीनियर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर 12 से ज्यादा मेडल अपने नाम कर चुके हैं. हाल ही में वह जर्मनी भी गए थे, जहां उन्होंने वर्ल्ड रैंकिंग के लिए मुकाबले खेले.

जीवन को अनुशासन में ढालने का जरिया है कुश्ती
उदित बताते हैं कि उनके गांव में हर दूसरे घर में एक पहलवान है. यहां करीब 200 से ज्यादा युवा कुश्ती से जुड़े हुए हैं और सभी का एक ही सपना है, देश के लिए मेडल जीतना. गांव के 3-4 पहलवान तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं जबकि नेशनल स्तर पर यहां के खिलाड़ी हर जगह अपनी पहचान बना रहे हैं. उदित का मानना है कि कुश्ती सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि जीवन को अनुशासन में ढालने का जरिया है. इससे शरीर फिट रहता है और युवा नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहते हैं. वह युवाओं को संदेश देते हैं कि हर बच्चे को किसी न किसी खेल से जरूर जुड़ना चाहिए.

ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है
आज उदित का सपना साफ है कि उन्हें ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है और अपने गांव, जिले और देश का नाम रोशन करना है. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरु, माता-पिता और गांव की मिट्टी को देते हैं, जहां से उन्होंने सब कुछ सीखा. उदित पटेल की यह कहानी बताती है कि छोटे गांव से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं, बस जरूरत होती है मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन की.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link