केन-बेतवा परियोजना: तीन दिवसीय सत्याग्रह खत्म, आदिवासियों में आक्रोश: अमित भटनागर बोले- नोटिस, लाठी से नहीं दबेगा आंदोलन – Chhatarpur (MP) News

केन-बेतवा परियोजना: तीन दिवसीय सत्याग्रह खत्म, आदिवासियों में आक्रोश:  अमित भटनागर बोले- नोटिस, लाठी से नहीं दबेगा आंदोलन – Chhatarpur (MP) News




छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में चल रहा तीन दिवसीय “सांकेतिक फांसी एवं रक्त-पत्र सत्याग्रह” सुकवाहा गांव में समाप्त हो गया। इस दौरान आदिवासियों और किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता दिखाई दिया। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में जिले के 14 गांवों के सैकड़ों आदिवासी, किसान और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार कलेक्टर के साथ हुई बैठक में प्रशासन ने ग्राम सभा, सर्वे और समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन 13 से 15 दिन बीत जाने के बाद भी अधिकांश गांवों में सर्वे टीम नहीं पहुंची। जहां टीम पहुंची, वहां भी केवल औपचारिकता निभाने और मकानों का सही नाप न करने का आरोप लगाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अधूरा और गलत सर्वे ही उनके गुस्से की मुख्य वजह बना है। नोटिस और प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी
अजयगढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम के बाद प्रशासन ने देर रात ग्रामीणों को शांति भंग के आरोप में नोटिस जारी किए। तहसीलदार और एसडीएम द्वारा भेजे गए इन नोटिसों में कम समय देकर अगले ही दिन उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों ने इसे आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया। बिजावर में लाठीचार्ज पर विरोध
बिजावर में महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी आक्रोश देखने को मिला। महिलाओं ने इसे अनुचित बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यही कानून है जो महिलाओं पर बल प्रयोग करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधिकारों की मांग को दबाया जा रहा है। आदिवासियों के सवाल और आंदोलन का रुख
आदिवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें जानकारी नहीं दे रहा, जबकि कानून का हवाला देकर उनके घर और जमीन खाली करवाई जा रही है। इसे उन्होंने ग्राम सभा और अधिकारों की अनदेखी बताया। जय किसान संगठन के नेतृत्व में यह आंदोलन लगातार विस्तार ले रहा है। अमित भटनागर ने कहा कि नोटिस, लाठी और झूठ से आंदोलन दबने वाला नहीं है और यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो यह और व्यापक व उग्र रूप लेगा। कार्यक्रम में बहादुर आदिवासी, अनमोल आदिवासी, रहीस रानी, अनंतराम गौड, रामकाली गौड, भागवती आदिवासी, राम दुलय्या सौर, शोभा रानी सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही।



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