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Bargi Dam News: कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए बांध के 3 खोलने का फैसला लिया गया. बांध के कुल 21 द्वारों में से गेट नंबर 10, 11 और 12 को खोला गया है. गेट नंबर 11 को 50 सेंटीमीटर और बाकी दो को 25-25 सेंटीमीटर की ऊंचाई दी गई है.
हालांकि, वजह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि इंडियन रेलवे का वो संकट है, जिसने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं. क्योंकि जबलपुर में रेलवे की जलापूर्ति अचानक ठप होने की कगार पर पहुंच गई है. बरगी बांध स्थित जल विद्युत उत्पादन इकाइयों में मेंटेनेंस का काम शुरू हुआ, तो टरबाइन से निकलने वाला पानी रुक गया. नतीजा यह हुआ कि नर्मदा का जलस्तर गिर गया और रेलवे के दारोगाघाट स्थित पंपहाउस सूखने लगे.
3 गेटों से छोड़ा जा रहा 112 क्यूमेक पानी
कार्यपालन यंत्री राजेश सिंह ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए बांध के 3 खोलने का फैसला लिया गया. बांध के कुल 21 द्वारों में से गेट नंबर 10, 11 और 12 को खोला गया है. गेट नंबर 11 को 50 सेंटीमीटर और बाकी दो को 25-25 सेंटीमीटर की ऊंचाई दी गई है. इस ‘इमरजेंसी रिलीज’ के जरिए करीब 112 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि रेलवे के पंपहाउस तक पर्याप्त पानी की धार पहुंच सके. बहरहाल अगर वक्त रहते कदम न उठाया जाता, तो ट्रेनों की आवाजाही से लेकर रेलवे कॉलोनियों तक हाहाकार मच जाता.
गर्मी में सावन सा अहसास, पर खतरा नहीं
पारा 40 डिग्री के नजदीक पहुंच गया है. बांध के गेटों से गिरता यह पानी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया है. हालांकि, प्रशासन ने साफ किया कि यह केवल रेलवे की जरूरत पूरी करने के लिए किया गया एक तकनीकी तालमेल है. पानी की मात्रा इतनी नियंत्रित रखी गई है कि नर्मदा के घाटों पर जलस्तर में कोई डरावनी बढ़ोतरी नहीं होगी. फिलहाल, बरगी का यह ‘बेमौसम’ अवतार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि लोग समझ नहीं पा रहे थे कि बिना बारिश के बांध आखिर ‘ओवरफ्लो’ कैसे हो गया.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें