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Sagar Angadh Devi Temple: सागर में नेशनल हाईवे 44 के किनारे अनगढ़ देवी का मंदिर है. ऊंची चट्टानों, घने जंगल और पहाड़ी से घिरे इस क्षेत्र में यह अद्भुत और अलौकिक मंदिर नवरात्रि में आस्था का बड़ा केंद्र होता है. यहां की महिमा अद्भुत है. जानें…
सागर: विंध्य पर्वत की श्रृंखलाओं पर मौजूद सागर के कण-कण में धर्म, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्म रचा बसा है. यहां सैकड़ों साल पुराने ऐतिहासिक रहस्यमयी प्रसिद्ध मंदिर हैं. नेशनल हाईवे 44 के किनारे अनगढ़ देवी का मंदिर है. ऊंची चट्टानों, घने जंगल और पहाड़ी से घिरे इस क्षेत्र में यह अद्भुत और अलौकिक मंदिर है. नवरात्रि में यह मंदिर बुंदेलखंड के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र रहता है. यहां विराजीं देवी हजारों परिवार की कुलदेवी हैं. नवरात्रि में लोग विशेष पूजन करने के लिए यहां आते हैं. माना जाता है कि दर्शन करने मात्र से ही मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं.
इसलिए नाम पड़ा अनगढ़
चट्टानों के बीच एक गुफा में प्राचीन मंदिर है, जो रजवाड़ी शासन काल के समय का बताया जाता है. यहां पर एक वैष्णव परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी से मंदिर की पूजा करता आ रहा है. यहां कई सालों से अखंड ज्योत भी जल रही है. खास बात ये कि इस गुफा के अंदर जो प्राचीन नौ देवी विराजमान हैं, उनका कोई स्वरूप नहीं है, न ही उनको कभी तराशने या फिर गढ़ने की कोशिश की गई. वह जैसी थीं, वैसी आज भी हैं. इसी वजह से इस मंदिर का नाम अनगढ़ पड़ा है. हालांकि, बाद में यहां पर स्वरूप वाली दूसरी प्रतिमाएं स्थापित की गईं. यहां जिनका स्वरूप नहीं है, उनका और जो नई स्वरूप वाली प्रतिमाएं हैं, दोनों ही प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं.
पहले भटक जाते थे लोग
मंदिर में पूजन करने वाले विवेक वैष्णव बताते हैं कि गढ़पहरा में जो हनुमानजी का मंदिर है और यह जो दूसरे छोर पर माता का मंदिर है, इनको एक समय के आसपास का ही माना जाता है, जो लगभग 400-500 साल पुराना है. यहां पर पहले आने के लिए कोई विशेष रास्ता नहीं था. लोग आते थे तो घंटों भटकते रहते थे. यह गुफा भी बीच चट्टान में मौजूद है. यहां पर हर किसी का आना संभव नहीं हो पाता था. लोगों को पता होता था फिर भी यहां नहीं पहुंच पाते थे, इसलिए भी इसका नाम अनगढ़ होना बताया जाता है.
मंदिर के आसपास मोहक दृष्य
हालांकि, आज के समय में गुफा के साथ मंदिर का भी यहां पर निर्माण कराया गया है. धर्मशाला है, सामुदायिक भवन है और जब इस मंदिर परिसर में खड़े होकर बाहर की तरफ देखते हैं तो यहां पर प्रकृति का अनूठा अद्भुत संगम देखने को मिलता है. सामने हरे पेड़ों से भरपूर सुंदरता को सहेजे पहाड़ी दिखाई देती है. यहां पक्षियों की चहचहाट का संगीत हृदय को आनंदित कर देता है. नीचे की तरफ से बहने वाला प्राकृतिक जल स्रोत इसकी सुंदरता को और बढ़ा देता है. मंदिर में नवरात्रि के अलावा कम लोगों का आना-जाना होता है. ऐसे में अगर कोई सुकून की तलाश में है, प्रकृति से लगाव है, अध्यात्म और धर्म संस्कृति में विश्वास रखता है तो यह जगह उसके लिए परफेक्ट है.
मंदिर तक ऐसे पहुंचें
मंदिर तक पहुंचाने के लिए दो रास्ते हैं. एक तो सीधा बहरिया चौराहे के पास एप्रोच रोड से होते हुए नेशनल हाईवे 44 पर पहुंचाता है. फिर यहां से ठीक 10 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी पर दूर से ही यह भव्य मंदिर दिखाई देने लगता है. यहां पर एक कंक्रीट की सड़क बनी है, जहां से होते हुए मंदिर तक पहुंचा जा सकता है. हालांकि इसके लिए करीब 100 सीढ़ियां भी चढ़नी पड़ती हैं. दूसरा रास्ता शहर के कबूला पुल से झांसी बाईपास वाले रोड से पहुंच सकते हैं, जिसकी दूरी 15 किलोमीटर होती है. गढ़ पहरा हनुमान मंदिर से पैदल जाने के लिए भी रास्ता है जिसकी दूरी करीब 2 किलोमीटर है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें