भोपाल में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने पीएम राहत और राहवीर योजना पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें जिले के पंजीकृत अस्पतालों को दोनों योजनाओं के प्रावधान, प्रक्रिया और जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब दुर्घटना के बाद पीड़ितों को 7 दिन तक 1.5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज मिलेगा। साथ ही घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, जिससे गोल्डन ऑवर में इलाज सुनिश्चित हो सके। अस्पतालों को दी गई योजनाओं की पूरी जानकारी स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यशाला में जिले के सभी पंजीकृत अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें पुलिस विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन, डिजिटल प्रक्रिया और आपसी समन्वय को लेकर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि योजनाओं का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को बिना देरी उपचार उपलब्ध कराना है। 7 दिन तक मिलेगा कैशलेस इलाज पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के पात्र पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार मिलेगा। साधारण मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया पुलिस सत्यापन और एकीकृत डिजिटल सिस्टम के माध्यम से संचालित होगी। मदद करने वालों को 25 हजार प्रोत्साहन राहवीर योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि कई बार लोग कानूनी झंझट के डर से मदद नहीं करते, ऐसे में यह योजना लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित करेगी। गोल्डन ऑवर में इलाज से बच सकती हैं 50% जानें कार्यशाला में बताया गया कि दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर में यदि पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो करीब 50% मौतों को रोका जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों योजनाओं को लागू किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) 112 से इन योजनाओं को जोड़ा गया है। कोई भी व्यक्ति 112 डायल कर नजदीकी अस्पताल की जानकारी और एम्बुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है। इससे पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
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