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रीवा रियासत में कई ऐसे राजा महाराजा हुए हैं, जो भवन निर्माण कराने में काफी दिलचस्पी रखते हैं. रीवा रियासत में कई ऐसे किला, गढ़ी, कोठी बनाई गई हैं जिनकी नक्काशी का आज भी कोई जवाब नहीं है. रीवा आने वाले पर्यटक आज भी इन ऐतिहासिक इमारतों को देखकर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं. रीवा शहर में एक ऐसी कोठी है, जिसमें में एक पातालतोड़ कुआं भी है, जिसे इतिहासकार 353 साल पुराना स्वीमिंग पूल कहते हैं.
मध्यप्रदेश के रीवा शहर में ऐसे कई ऐतिहासिक भवन हैं, जिनकी गिनती मध्य भारत के चुनिंदा खूबसूरत इमारतों में होती हैं. इनमें से एक ऐसी ही गढ़ी रीवा शहर में है, जो आज भी अपने अद्भुत शिल्प शैली को लेकर चर्चा में रहती है. इस कोठी में एक पातालतोड़ कुआं भी है, जिसे इतिहासकार 353 साल पुराना स्वीमिंग पूल कहते हैं. कभी यह जगह रानी और उनकी सहेलियों की पसंदीदा जगह हुआ करती थी. रानी और उनकी सहेलियां यहां स्नान किया करती थीं. पातालतोड़ कुआं मध्य भारत के प्रमुख स्नानागारों में शुमार था.
रीवा के महाराज ने करवाया था निर्माण
इतिहासकार असद खान बताते हैं कि इस गढ़ी की कलाकृतियां और शिल्पकारी अपने आप में महत्वपूर्ण है. इस गढ़ी का निर्माण महाराणा प्रताप की परपोती अजब कुंवरी के लिए किया गया था. रीवा के तत्कालीन महाराज भाव सिंह ने वर्ष 1664 और 1671 ईस्वी के बीच इसका निर्माण कराया था. कोठी में स्थित स्नानागार लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के स्नानगाह के अलावा, राजस्थान एवं मालवा की स्थापत्य शैलियों से प्रभावित है.
देखरेख के अभाव में पहचान खो रही है कोठी
इतिहासकार का कहना है कि यह इमारत ऐतिहासिक महत्व और पुरातत्व अध्ययन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन धीरे-धीरे देखरेख के अभाव में यह कोठी अपनी पहचान खो रही है. तीन मंजिल की यह इमारत है. प्रथम तल में एक वर्गाकार छोटा सा कक्ष है, जिसमें चारों ओर खिड़कियां हैं. इसकी नोक तुर्क शैली से प्रभावित है. इस जगह पर बैठकर यहां की रानी जल क्रीड़ा का आनंद लेती थीं.
ध्वस्त हो चुके हैं कई कक्ष
रीवा की स्थापत्य शैली को देखना है, तो यह महत्वपूर्ण इमारत बेहद खास है. इस इमारत को देखकर यह भी मालूम होता है कि यह राजस्थानी और मुगल स्थापत्य शैली का संगम है. इस बावड़ी युक्त कोठी में 40 कक्ष हुआ करते थे. जो आज पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं. 1985 तक यह कक्ष महफूज थे. लेकिन उसके बाद यह देखरेख के अभाव में ध्वस्त हो गए.
गर्मियों के दिनों में होता है ठंडक का अहसास
इस कोठी का निर्माण कुछ इस तरह से किया गया था कि गर्मियों के दिनों में भी यहां ठंडक का एहसास होता था. चारों ओर से यहां हवा पास होती थी. यह इमारत दिखने में भी बेहद खूबसूरत थी. इतिहासकार असद खान ने बताया कि अगर इस कोठी का सरकार के द्वारा सही ढंग से रखरखाव किया जाए, तो इसे रीवा का प्रमुख पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है और इसे एक नई पहचान मिल सकती है. यहां के स्नानागार में आज भी साफ पानी है.