आप भी पी रहे हैं ‘बीमारी वाला’ ठंडा पानी? जानिए क्यों दादी-नानी का मटका वाला आइडिया है हिट

आप भी पी रहे हैं ‘बीमारी वाला’ ठंडा पानी? जानिए क्यों दादी-नानी का मटका वाला आइडिया है हिट


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Matka ka Pani pine ke Fayde: भीषण गर्मी के बीच ठंडा पानी राहत जरूर देता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज का पानी आपकी सेहत पर बुरा असर भी डाल सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार मटके का पानी न केवल शरीर के तापमान के अनुकूल होता है बल्कि यह पाचन को बेहतर बनाकर कई मौसमी बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है.

शिवांक द्विवेदी, सतना: भीषण गर्मी का मौसम आते ही लोग राहत पाने के लिए ठंडे पानी की तलाश में फ्रिज की ओर भागते हैं लेकिन क्या यह ठंडक आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस ठंडे पानी को हम राहत समझकर पीते हैं वही कई बार शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसके उलट सदियों पुराना देसी तरीका यानी मटके का पानी न सिर्फ शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है बल्कि स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है.

फ्रिज का ठंडा पानी बन सकता है परेशानी की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी शरीर के तापमान से मेल नहीं खाता जिससे गले और पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है. कई बार बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से गले में खराश, सर्दी-जुकाम और गले की जकड़न जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इसके अलावा पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है जिससे कब्ज और एसिडिटी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शरीर अचानक अत्यधिक ठंडे तापमान को स्वीकार नहीं कर पाता जिससे असंतुलन पैदा होता है.

मटके का पानी, नेचुरल कूलिंग का वैज्ञानिक तरीका
मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है जो आमतौर पर 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. यह तापमान शरीर के अनुकूल होता है जिससे न तो गले पर असर पड़ता है और न ही पाचन तंत्र पर. मिट्टी के मटके में मौजूद सूक्ष्म छिद्र पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं जिससे उसमें प्राकृतिक ताजगी बनी रहती है. यही कारण है कि मटके का पानी पीने से शरीर को राहत तो मिलती ही है साथ ही यह संतुलन भी बनाए रखता है.

मिनरल्स और शुद्धता का भी है खास संबंध
विशेषज्ञ बताते हैं कि मिट्टी के मटके में पानी रखने से उसमें प्राकृतिक रूप से मिनरल्स का संतुलन बेहतर हो जाता है. मटका वातावरण के अनुसार पानी को संतुलित करता है जिससे उसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो जाते हैं. वहीं लंबे समय तक फ्रिज में रखा पानी कई बार बाहरी तत्वों या बैक्टीरिया के संपर्क में आ सकता है जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.

एक्सपर्ट की राय: परंपरा में छिपा है विज्ञान
लोकल 18 से बातचीत में जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. अखिलेश खरे ने बताया कि मटके का पानी पूरी तरह नेचुरल होता है और शरीर के लिए ज्यादा उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि भारतीय शरीर हजारों सालों से इसी तरह के पानी का आदी रहा है इसलिए यह न सिर्फ प्यास बुझाता है बल्कि स्वास्थ्य को भी संतुलित रखता है. जिसके चलते गर्मी में मटके का पानी सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प है.

 देसी तरीका ही है स्मार्ट चॉइस
तेज गर्मी के इस दौर में जहां हर कोई तुरंत राहत चाहता है वहीं सेहत को नजरअंदाज करना बड़ी गलती हो सकती है. ऐसे में मटके का पानी एक ऐसा विकल्प है जो न सिर्फ ठंडक देता है बल्कि शरीर को बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है. आधुनिकता के बीच अगर पारंपरिक तरीकों को अपनाया जाए तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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