Last Updated:
Multicropping Farming Benefits: सीधी जिले के किसान अब सहफसली खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं और पारंपरिक खेती से आगे निकल रहे हैं. इस तकनीक में एक ही खेत में कई फसलें उगाकर ज्यादा उत्पादन और मुनाफा हासिल किया जा रहा है. कम लागत में किसान एक फसल चक्र में डेढ़ से दो लाख रुपए तक कमा सकते हैं. अलग-अलग समय पर फसल तैयार होने से लगातार आमदनी भी बनी रहती है. जानिए कैसे यह आधुनिक खेती किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है.
Multicropping ke Fayde: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं. खासतौर पर सहफसली खेती (मल्टी क्रॉपिंग) तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिससे किसानों की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
एक साथ कई फसलें, ज्यादा फायदा
किसान सलाहकार Avneesh Patel के मुताबिक अब किसान भिंडी को मुख्य फसल बनाकर उसके साथ मूली, चुकंदर, पालक और धनिया उगा रहे हैं. इससे खेत का हर हिस्सा उपयोग में आता है और उत्पादन भी कई गुना बढ़ जाता है.
स्मार्ट तरीके से होती है खेती
इस तकनीक में फसलें अलग-अलग गहराई पर उगाई जाती हैं. मूली जमीन के अंदर, जबकि पालक और धनिया सतह के पास उगते हैं. इससे मिट्टी के पोषक तत्वों का सही उपयोग होता है और फसलें बिना नुकसान के अच्छी तरह बढ़ती हैं.
कम लागत, तगड़ा मुनाफा
एक बीघा में इस खेती की लागत करीब 20-25 हजार रुपए आती है. लेकिन सही देखभाल और समय पर प्रबंधन से किसान एक ही फसल चक्र में 1.5 से 2 लाख रुपए तक कमा सकते हैं.
मूली: 25-30 दिन
धनिया: 30 दिन
पालक: 30-35 दिन
अलग-अलग समय पर फसल तैयार होने से किसानों को लगातार आमदनी मिलती रहती है.
जोखिम भी कम, फायदा ज्यादा
इस खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर एक फसल का दाम कम हो जाए, तो दूसरी फसल नुकसान की भरपाई कर देती है. यानी कम जोखिम और ज्यादा मुनाफा. कम जगह में ज्यादा उत्पादन, कम लागत और ज्यादा कमाई यही वजह है कि सहफसली खेती अब किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें