कोई godfather नहीं, पॉकेट मनी से शुरू किया मिशन! 3 दोस्तों ने कैसे बदलीं सैकड़ों जिंदगी?

कोई godfather नहीं, पॉकेट मनी से शुरू किया मिशन! 3 दोस्तों ने कैसे बदलीं सैकड़ों जिंदगी?


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Satna Blood Donation Group: सतना में युवाओं की सोच से शुरू हुई आरम्भ समिति आज सेवा का बड़ा नाम बन चुकी है. रक्तदान से लेकर घायल पशुओं की मदद, बेसहारा बुजुर्गों के इलाज और सामाजिक जागरूकता अभियानों जैसे अनेकों कार्य यह टीम पिछले 8 वर्षों से कर रही है और अब तक हजारों को नई जिंदगियां दे चुकी है, खास बात ये है कि यह सेवा पॉकेट मनी की बचत से शुरू हुई थी.

शिवांक द्विवेदी, सतना: सतना जिले में युवाओं की एक छोटी-सी पहल आज बड़े सामाजिक बदलाव की कहानी बन चुकी है. घर से मिलने वाली पॉकेट मनी से शुरू हुई सेवा अब सैकड़ों जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन गई है. आरम्भ युवाओं की एक नई सोच समिति ने पिछले 8 वर्षों में न केवल रक्तदान के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है बल्कि बुजुर्गों, बेघरों और घायल पशुओं की मदद कर समाज सेवा का नया अध्याय भी लिखा है.

तीन दोस्तों की सोच से बनी बड़ी पहल
इस समिति की शुरुआत तीन युवाओं अंकित शर्मा, सूर्य प्रकाश गुप्ता और रोहित सिंह तिवारी ने की थी. शुरुआत में उनका उद्देश्य सिर्फ एक था रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना. अस्पतालों में रक्त की कमी और लोगों में फैली भ्रांतियों को देखकर इन युवाओं ने ठान लिया कि वे इस दिशा में कुछ ठोस करेंगे. लोकल 18 से बातचीत में समिति के अध्यक्ष अंकित शर्मा ने बताया कि कई बार उन्होंने मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए भटकते देखा और इसी समस्या ने उन्हें इस मुहिम की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया.

पॉकेट मनी से सेवा का सफर
शुरुआती दौर में समिति के पास कोई संसाधन नहीं थे. टीम के सदस्य अपने घर से मिलने वाली पॉकेट मनी को बचाकर सामाजिक कार्यों में लगाते थे. चाहे रक्तदाताओं के लिए जूस की व्यवस्था करनी हो या गरीबों को भोजन कराना, हर खर्च खुद की जेब से उठाया जाता था. उस समय टीम में केवल 8-10 लड़के और 5-6 लड़कियां थीं लेकिन उनके हौसले बड़े थे.

रक्तदान से बनाई नई पहचान
समिति ने अस्पतालों में जाकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए. इन प्रयासों का असर यह हुआ कि आज तक 7000 यूनिट से अधिक रक्तदान कराया जा चुका है. इसके अलावा प्लाज्मा और प्लेटलेट दान भी करवाया गया है. थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को नियमित रक्त उपलब्ध कराना भी समिति की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है. आपातकालीन परिस्थितियों में भी यह टीम तुरंत सक्रिय हो जाती है और जरूरतमंदों तक रक्त पहुंचाने का काम करती है. इस पहल से अब तक कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है.

पशु सेवा और बुजुर्गों की मदद में भी आगे
रक्तदान के अलावा सीमित सतना में घायल और बीमार आवारा पशुओं की मदद के लिए भी लगातार काम कर रही है. सड़कों पर पड़े घायल पशुओं को उठाकर अस्पताल पहुंचाना और उनका इलाज कराना इस टीम की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. इसके अलावा रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा पड़े बुजुर्गों को भी समिति द्वारा जिला अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज कराया जाता है. कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बुजुर्ग बेहद खराब स्थिति में मिले लेकिन इस टीम ने उन्हें नई जिंदगी देने का काम किया.

साइकिल यात्राओं से उठाई सामाजिक आवाज
समिति ने कई सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए साइकिल यात्राएं भी की हैं. निर्भया मामले में न्याय की मांग को लेकर सतना से दिल्ली तक साइकिल यात्रा की गई. इसके अलावा महिला सशक्तिकरण को लेकर कानून बनाने की मांग के लिए सतना से भोपाल तक यात्रा कर तत्कालीन मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया. तिरंगा यात्रा, पद यात्रा और अन्य सामाजिक अभियानों में भी इस टीम की सक्रिय भागीदारी रही है.

शिक्षा और जरूरतमंदों के लिए लगातार प्रयास
समिति द्वारा गरीब बच्चों को शिक्षा सामग्री वितरित की जाती है. सर्दियों में कंबल वितरण और अन्य सामाजिक सेवा कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं. आरम्भ युवाओं की एक नई सोच समिति का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर निःस्वार्थ सेवा करना है. युवाओं को सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करना और शहर को स्वच्छ एवं बेहतर बनाना भी इनके लक्ष्य में शामिल है. आज यह टीम 50 से अधिक सदस्यों के साथ न सिर्फ सतना बल्कि भोपाल और दिल्ली जैसे कई शहरों में अपनी सेवाएं दे चुकी है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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