सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में एक बाघ पुलिया के नीचे आराम करता हुआ देखा गया। तेज धूप और गर्मी से बचने के लिए बाघ रुखड़ बफर क्षेत्र में छांव में बैठा था। इस घटना का गुरुवार को वीडियो सामने आया है। वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों के लिए यह दृश्य असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर बाघ घने जंगलों या जलस्रोतों के पास विश्राम करते हैं। पुलिया के नीचे छांव में बैठना उसकी बदलती परिस्थितियों के प्रति अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पेंच नेशनल पार्क में बाघों को देखने आते हैं, और ऐसे दुर्लभ दृश्य उनके सफारी अनुभव को यादगार बनाते हैं। पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में फैला हुआ है। इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र के नागपुर जिले तक भी विस्तृत है। पेंच नदी के नाम पर इस उद्यान को 1975 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था, जिसे बाद में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह क्षेत्र घने जंगलों, घास के मैदानों और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। PTR में 250 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां यह टाइगर रिजर्व विश्व प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की कृति “द जंगल बुक” से भी संबंधित माना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ता, चीतल, सांभर, नीलगाय और गौर जैसे कई वन्यजीव निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त, पार्क में 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां भी दर्ज की गई हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी पेंच का विशेष महत्व है। पर्यटक जीप और हाथी सफारी के माध्यम से जंगल का भ्रमण कर सकते हैं। अक्टूबर से जून तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पेंच टाइगर रिजर्व न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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