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Sidhi News: हर्बल कैफे की कर्मचारी अनुप्रिया कुशवाहा ने लोकल 18 से कहा कि महुआ का फल प्राकृतिक रूप से मीठा होता है. इसमें तमाम पोषक तत्व पाए जाते हैं. लड्डू बनाने से पहले महुआ को अच्छी तरह साफ कर उसका प्रसंस्करण किया जाता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी शहर में स्थित हर्बल कैफे केंद्र में महुआ से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. स्व-सहायता समूह की महिलाएं यहां महुआ को पारंपरिक शराब से जोड़ने की धारणा को बदलते हुए इसे लड्डू में बदल रही हैं. यह केंद्र वन विभाग के सहयोग से संचालित वन धन उत्पाद केंद्र का हिस्सा है. महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ये उत्पाद न केवल बाजार में लोकप्रिय हो रहे हैं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर प्रदान कर रहे हैं. इस लड्डू को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी खाया है. ग्राम तिलवानी निवासी और राज लक्ष्मी बंधन स्व-सहायता समूह की सदस्य चंद्रावती सिंह गौड़ ने लोकल 18 को बताया कि क्षेत्र में महुआ के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. पहले गांव के लोग इसका उपयोग केवल शराब बनाने के लिए करते थे, जिससे कई सामाजिक समस्याएं भी उत्पन्न होती थीं लेकिन एक संस्था के माध्यम से महिलाओं को जानकारी मिली कि महुआ से लड्डू, अचार और अन्य खाद्य पदार्थ भी बनाए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि इसके बाद गांव की महिलाओं ने मिलकर एक समूह बनाया और महुआ से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रयोग शुरू किया. शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर किया गया लेकिन धीरे-धीरे इन उत्पादों का स्वाद लोगों को पसंद आने लगा. मांग बढ़ने के साथ महिलाओं ने इसे एक छोटे व्यवसाय के रूप में विकसित कर लिया. आज ये महिलाएं महुआ से बने उत्पादों के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त भी हो रही हैं.
पोषक तत्वों से भरपूर महुआ का फल
हर्बल कैफे की कर्मचारी अनुप्रिया कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि महुआ का फल प्राकृतिक रूप से मीठा होता है और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. लड्डू बनाने से पहले महुआ को अच्छी तरह साफ कर उसका प्रसंस्करण किया जाता है. इसके बाद इसमें गुड़ और घी मिलाकर लड्डू तैयार किए जाते हैं. ये लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं.
आत्मनिर्भर बनने की नई राह
इस पहल की खास बात यह भी है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी इन महुआ लड्डुओं का स्वाद चख चुके हैं, जिससे इन उत्पादों को और पहचान मिली है. आज सीधी जिले की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि अगर सही मार्गदर्शन और मेहनत मिले, तो पारंपरिक संसाधनों को भी नए रूप में ढालकर सफलता हासिल की जा सकती है. महुआ को कभी सिर्फ शराब बनाने के लिए जाना जाता था, आज उसी से बने लड्डू बाजार में लोकप्रिय हो रहे हैं. यह पहल न केवल सामाजिक बदलाव का उदाहरण बन रही है बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई राह भी दिखा रही है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.