सागर में 32 वर्षीय भक्त कीलों के आसन पर बैठा: पलक, जीभ और गले को धागे से छेदा; दिन में पी रहा सिर्फ 2 चम्मच जल – Sagar News

सागर में 32 वर्षीय भक्त कीलों के आसन पर बैठा:  पलक, जीभ और गले को धागे से छेदा; दिन में पी रहा सिर्फ 2 चम्मच जल – Sagar News




सागर जिले के रहली विकासखंड के ग्राम चांदपुर में चैत्र नवरात्रि के दौरान 32 वर्षीय कमलेश कुर्मी पिछले एक सप्ताह से कीलों के आसन पर बैठकर कठिन साधना कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पलक, कंठ (गला), जीभ और हाथों को रेशम के धागों से छेदकर उन्हें जवारों तक पहुंचाया है। सुना सिंगपुर निवासी कमलेश अपने गुरु भाई धर्मेंद्र विश्वकर्मा के घर पर यह साधना कर रहे हैं और पिछले 7 दिनों से कुर्सी पर कीलों के ऊपर एक ही मुद्रा में बैठे हुए हैं। वर्तमान में इस कठोर व्रत के दौरान वे दिन भर में मात्र दो चम्मच जल ग्रहण कर रहे हैं और उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। 20 दिन पहले त्यागा अन्न, खुद बनाई मिट्टी की प्रतिमा कमलेश कुर्मी पिछले 5 साल से चांदपुर में अपने गुरु भाई धर्मेंद्र विश्वकर्मा के घर पर माता की साधना कर रहे हैं। गुरुभाई धर्मेंद्र ने बताया कि कमलेश माता की आराधना करने के लिए एक महीने पहले तैयारी शुरू कर देते हैं। उन्होंने एक महीने पहले ही मिट्टी से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाना शुरू किया था। नवरात्रि शुरू होने के करीब 20 दिन पहले उन्होंने अन्न त्याग दिया और कठिन व्रत के लिए अभ्यास शुरू कर दिया। 9 दिन तक एक ही आसन पर बैठेंगे कमलेश नवरात्रि में कमलेश ने अपने हाथों से बनाई प्रतिमा के समक्ष 9 दिन तक एक ही आसन पर बैठकर शरीर के विभिन्न अंगों में बाने (रेशम के धागे) को छेदकर व्रत धारण किया है। उन्होंने पलक, कंठ, जीभ और हाथों को छेदकर धागों को जवारों तक पहुंचाया है। इस कठोर व्रत के समय गला सूखने पर कमलेश सिर्फ दो चम्मच जल ग्रहण कर रहे हैं। पिछले साल कीलों की शैय्या पर लेटकर स्थापित किए थे जवारे यह कोई पहली बार नहीं है जब कमलेश ने ऐसी कठिन साधना की हो। पिछले साल चैत्र नवरात्रि में उन्होंने कीलों की शैय्या पर लेटकर अपने शरीर के ऊपर जवारे स्थापित किए थे। उनकी इस साधना को देखने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण और भक्त चांदपुर पहुंच रहे हैं। वर्तमान में मां की प्रतिमा के सामने रोजाना भजन-कीर्तन का दौर जारी है।



Source link