1 या 2 अप्रैल, चैत्र पूर्णिमा कब? भूल से भी न करें ये काम वरना पछताना पड़ेगा

1 या 2 अप्रैल, चैत्र पूर्णिमा कब? भूल से भी न करें ये काम वरना पछताना पड़ेगा


Last Updated:

Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा पर भूलकर भी तामसिक भोजन, मांस या मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है.

उज्जैन. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास को धर्म, दान और पुण्य का विशेष समय माना जाता है. इस महीने की पूर्णिमा का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह बेहद शुभ और फलदायी तिथि मानी गई है. इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. चैत्र पूर्णिमा का दिन भाग्य को मजबूत करने और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का भी उत्तम अवसर होता है. इस बार यह तिथि खास शुभ संयोग में आ रही है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है. इस दौरान किए गए दान-पुण्य का फल जल्दी और अधिक मिलता है. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार चैत्र पूर्णिमा पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, वृद्धि योग के साथ ध्रुव योग का भी निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को खास बनाते हैं. इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की कई बाधाएं दूर हो सकती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा की शुरुआत एक अप्रैल को सुबह 07 बजकर 06 मिनट लगभग पर होगी और समापन अगले दिन यानी दो अप्रैल को सुबह 07 बजकर 41 मिनट लगभग पर होगा. ऐसे में दो अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी. इस दिन चंद्रोदय शाम 07 बजकर 02 मिनट पर होगा.

चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस पावन दिन पर स्नान और दान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के पापों का क्षय होता है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है. इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए ये कर्म जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं.

चैत्र पूर्णिमा पर भूल से भी न करें ये काम
चैत्र पूर्णिमा के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. मांस या मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इससे देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और व्यक्ति को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है. हिंदू धर्म में काला रंग शुभता का प्रतीक नहीं माना गया है, इसलिए चैत्र पूर्णिमा के दिन काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इस दिन सफेद कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है. चैत्र पूर्णिमा के दिन घर में लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए. माना जाता है कि इससे देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link