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जब कभी क्रिकेट इतिहास की सबसे खराब पिचों की चर्चा होती है, तो 1998 के जमैका टेस्ट का नाम सबसे ऊपर आता है. जमैका के किंग्स्टन स्थित सबीना पार्क में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले पहले टेस्ट मैच ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. टेस्ट क्रिकेट के 121 साल के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी मैच को पिच की खतरनाक स्थिति के कारण खेल शुरू होने के कुछ ही देर बाद रद्द करना पड़ा.
38 साल पहले सबीना पार्क मैदान पर टेस्ट मैच सिर्फ 62 गेंद के बाद खत्म हो गया था
नई दिल्ली. हर तारीख से जुड़ी एक तस्वीर होती है जिसकी कोई ना कोई कहानी होती है. 29 जनवरी, 1998 का दिन क्रिकेट के सुनहरे इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है. जमैका के किंग्स्टन स्थित सबीना पार्क में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाले पहले टेस्ट मैच ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी.
टेस्ट क्रिकेट के 121 साल के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी मैच को पिच की खतरनाक स्थिति के कारण खेल शुरू होने के कुछ ही देर बाद रद्द करना पड़ा. मैच की सुबह जब इंग्लैंड के कप्तान माइक आर्थटन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनट उनके बल्लेबाजों के लिए किसी डरावने सपने जैसे होंगे.
खौफनाक शुरुआत और खतरनाक पिच
इंग्लिश बल्लेबाज मैदान पर उतरे तो उनके सामने वेस्टइंडीज के कर्टनी वॉल्श और कर्टली एम्ब्रोस जैसे दुनिया के सबसे घातक तेज गेंदबाज थे. पिच की स्थिति बेहद असंतुलित थी. कहीं हरी घास थी तो कहीं गहरी दरारें. खेल शुरू होते ही गेंद अजीबोगरीब व्यवहार करने लगी. एम्ब्रोस और वॉल्श की गेंदें पिच पर टप्पा खाने के बाद कभी सीधे बल्लेबाजों के चेहरे (आंखों) की तरफ बिजली की रफ्तार से आतीं, तो कभी घुटनों के नीचे ही रह जातीं. पिच की इस ‘दोहरी प्रकृति’ ने बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा कर दिया.
चोटिल बल्लेबाज और अंपायरों का हस्तक्षेप
महज 10.1 ओवर के खेल में इंग्लैंड के बल्लेबाजों के शरीर पर गेंदों के अनगिनत निशान पड़ चुके थे. एलेक स्टीवर्ट और माइक आर्थटन जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी गेंद की उछाल को समझ पाने में नाकाम थे. स्कोर बोर्ड पर जब 17 रन पर 3 विकेट गिरे, तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी. इंग्लैंड के फिजियो को बार-बार मैदान पर भागना पड़ रहा था. मैच के अंपायर स्टीव बकनर और श्रीनिवास वेंकटराघवन ने महसूस किया कि पिच खेलने लायक नहीं है और यह खिलाड़ियों की जान के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है. वेस्टइंडीज के कप्तान ब्रायन लारा से चर्चा करने के बाद, मैच को रोक दिया गया और अंततः मैच को आधिकारिक तौर पर रद्द घोषित कर दिया गया.
क्रिकेट जगत में हलचल
यह घटना केवल एक मैच का रद्द होना नहीं थी, बल्कि क्रिकेट प्रशासन की विफलता का प्रतीक थी. सबीना पार्क की इस पिच को मैच से कुछ समय पहले ही दोबारा बनाया गया था, लेकिन वह पूरी तरह से ‘सेट’ नहीं हो पाई थी. पिच पर दरारें इतनी गहरी थीं कि गेंद वहां पड़ते ही अपनी दिशा और गति अनिश्चित रूप से बदल रही थी. सबीना पार्क की इस घटना ने ICC को पिचों के मानक और सुरक्षा नियमों को लेकर कड़े कदम उठाने पर मजबूर किया. आज भी जब कभी क्रिकेट इतिहास की सबसे खराब पिचों की चर्चा होती है, तो 1998 के जमैका टेस्ट का नाम सबसे ऊपर आता है.