MP का पहला जिला जहां AI संभालेगा आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी, फर्जी अटेंडेंस पर लगेगा ब्रेक

MP का पहला जिला जहां AI संभालेगा आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी, फर्जी अटेंडेंस पर लगेगा ब्रेक


Bal Ginti App: बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का पहला केंद्र आंगनवाड़ी होता है. शासन अपनी ऐसी कई योजनाएं चलाता है, जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है. लेकिन जब योजनाएं कागजों पर सीमित रह जाती है, तो न सिर्फ बच्चों के अधिकारों का हनन होता है बल्कि सिस्टम का मखौल बनता है. लेकिन अब योजनाओं की क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना की अनोखी पहल सामने आई है, जिसमें अब एआई के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग की जाएगी. ऐसे में बच्चों की अटेंडेंस बढ़ेगी साथ ही कुपोषित बच्चों की सीधी मॉनिटरिंग की जाएगी. ऐसे में बालाघाट एमपी का पहला जिला बनेगा जहां पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर एआई की मदद से निगरानी रखी जाएगी.

बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने लोकल 18 को बताया कि बालाघाट के ही युवाओं ने एक ऐप बनाया है, जिसका नाम “राइज बाल गिनती” है. इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों पर सुबह 11 बजे आंगनबाड़ी केंद्रों से एक तस्वीर एप पर अपलोड की जाएगी, जिसकी निगरानी जिला प्रशासन कर सकेगा.

कैसे आया ये अनोखा आइडिया
बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना इससे पहले उज्जैन बतौर जिला पंचायत सीईओ पदस्थ थे. ऐसे में उन्होंने इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल महाकाल मंदिर में आने वाले भक्तों की गणना में इसका इस्तेमाल किया था. इसमें भक्तों के फेस और हेड काउंट के जरिए गणना शुरू की थी. अब उसी आइडिया को लेकर आंगनबाड़ी में लागू किया जा रहा है.

रिकॉर्ड के मुताबिक उपस्थिति नहीं रहती थी
निरीक्षण के दौरान जब आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रशासन की टीमें जाती थी, तब वहाँ मौजूद बच्चे और पोषण ट्रैकर में दर्ज बच्चों की संख्या में अंतर मिलता था. इसमें फिर एक बात जो निकलकर आई, वो ये है कि बच्चे आंगनबाड़ी जाते थे, तो वह जल्दी निकल आते थे या फिर गलत जानकारी पोषण ट्रैकर पर भरी जा रही होगी. इस शंका को दूर करने के लिए ये राइज बाल गिनती ऐप काम आएगा.

शुरु हो चुका है पायलट प्रोजेक्ट
बालाघाट के 40 आंगनबाड़ी केंद्रों पर फेस ट्रैकिंग का काम शुरू किया गया है. इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुपरवाइजर इसका ऐप का इस्तेमाल कर तस्वीर लेकर अपलोड करना है. शाम पांच बजे तक इसकी रिपोर्ट प्रशासन को मिल जाएगी.

बालाघाट के युवाओं ने ऐप किया तैयार
इस ऐप को बालाघाट के सॉफ्टवेयर डेवलपर श्रेयांश जैन ने अपनी 25 लोगों कि तैयार किया है. इस ऐप को डेवलप करने वाली कंपनी के डायरेक्टर मंजू मंगल और नीना मोदी है. इसे बनाने में लगभग सात दिनों का समय लगा. अब तक के इस एप से 100 प्रतिशत एक्यूरेसी है. ऐसे में अब पूरे मध्य प्रदेश के लिए यह एप तैयार हो रहा है. इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की आईडी पासवर्ड होगी. इसमें वह सिर्फ तस्वीर खींचेगी और पोर्टल पर अपलोड हो जाएगी. इस ऐप की खास बात ये है कि यह बिना नेटवर्क के भी काम करता है. अगर किसी आंगनबाड़ी केंद्र में नेटवर्क नहीं है, तो वह रियल टाइम में तस्वीर ले सकते हैं. जैसे ही वह नेटवर्क में जाएंगे तब तस्वीर पोर्टल पर आ जाएगी.

मील का पत्थर साबित होगा ऐप 
राइज बाल गिनती ऐप आंगनबाड़ी केंद्रों में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगा. पोषण वितरण में जो गड़बड़ियां रोकी जा सकेगी. ऐसे में कुपोषण, बच्चों की अटेंडेंस, हॉट मील कुक सहित कई चीजों में पारदर्शिता आएगी.



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