MP के शख्स ने मांगी इच्छामृत्यु, राष्ट्रपति से लगाई गुहार; वजह कर देगी आपको हैरान!

MP के शख्स ने मांगी इच्छामृत्यु, राष्ट्रपति से लगाई गुहार; वजह कर देगी आपको हैरान!


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जल संसाधन विभाग के अमीन उमेश कुमार ने इच्छामृत्यु देने की मांग की है. उनकी इस मांग ने सभी को चौंका दिया है. उन्होंने यह भी बताया है कि अब उन्हें वेतन नहीं मिला है और न्याय मिलने की उम्मीद कम है. इसलिए इच्छामृत्यु ही एकमात्र विकल्प है. उनसे अभी तक विभाग का कोई भी बड़ा अधिकारी मिलने नहीं आया है.

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मध्य प्रदेश के उमेश शर्मा ने मांगी इच्छामृत्यु

रिपोर्ट-रामाकांत दुबे

जल संसाधन विभाग के अमीन उमेश शर्मा अभी सिवनी जिले में पदस्थ हैं. अब उन्होंने राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं विभागीय मंत्री तुलसी सिलावट से इच्छा मृत्यु की मांग की है. उन्होंने बताया है कि उन्हें पांच महीने से वेतन नहीं मिला है और प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रेम नारायण नाग के ऊपर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया है.

पांच महीने से पीड़ित को नहीं मिला वेतन
उमेश शर्मा प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित नर्मदा भवन में दो दिनों से हड़ताल पर बैठे हुए हैं. उन्होंने कहा कि मैं पांच महीने से वहां के कार्यपालन यंत्री प्रेम नारायण नाग के द्वारा प्रताड़ित हूं और लगातार मैं अपनी पीड़ा प्रमुख अभियंता महोदय को बता रहा हूं. पांच महीने से मुझे वेतन नहीं मिल रहा है. मैं अपने बच्चों को खाना नहीं खिला पा रहा हूं.

उन्होंने कहा कि अब मुझे ऐसा लगा रहा है कि मुझे न्याय नहीं मिलेगा. मैं देश के राष्ट्रपति, राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री और मंत्री तुलसी तिलावट से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे इच्छामृत्यु की मांग करता हूं.

परेशान होकर इच्छामृत्यु की कर डाली मांग
पीड़ित उमेश कुमार शर्मा की तरफ से कहा गया है कि मैं एक सम्मानित कर्मचारी था और विभाग मेरे साथ अन्याय कर रहा है. उस अधिकारी की जांच भी नहीं हो पा रही है. मुझे इच्छामृत्यु दे दी जाए. ताकि मैं इस पीड़ा से मुक्त हो सकूं. पीड़ित का कहना अभी तक विभाग के कोई भी आलाधिकारी ने मेरी परेशानी का संज्ञान तक नहीं लिया है और विभाग का कोई भी अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की.

हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी
वहीं इससे पहले गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पैसिव यूथेनेशिया के लिए एम्‍स में भर्ती कराया गया था, प्रकिया के तहत नियमानुसार उनके लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाए गए थे. पहले उनका खाना बंद किया गया था और बाद में उन्हें पानी भी नहीं दिया गया. हरीश 13 साल से ज्यादा समय तक कोमा में था. वह देश के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी.



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