कटनी में नवमी पर जवारे विसर्जन चल समारोह निकाला गया। शुक्रवार देर शाम शहर के खिरहनी, बस स्टैंड, भट्टा मोहल्ला और नई बस्ती सहित अलग-अलग इलाकों से हजारों भक्तों ने इसमें हिस्सा लिया। पुराने जालपा देवी मंदिर से निकलने वाला जुलूस सबसे ज्यादा देखने लायक रहा। नगर की देवी मां जालपा के मंदिर में पूजा-पाठ के बाद जवारा जुलूस की शुरुआत हुई। सिर पर जवारे रखे महिला श्रद्धालु और माता के जयकारे लगाते भक्तों की टोली ने पूरे माहौल को भक्ति के रंग में डुबो दिया। ढोल-धमाकों और पारंपरिक बाजे के साथ यह समारोह आगे बढ़ा। भक्तों के बाने रहे चर्चा में जुलूस में भक्तों के पहने गए ‘बाने’ ने सबका ध्यान खींचा। अपनी मन्नत और आस्था के कारण कई भक्तों ने लोहे के नुकीले बाने (सरिया) को अपने गालों के आर-पार करवाकर जुलूस में हिस्सा लिया। कटनी नदी पर विसर्जन जवारा चल समारोह अपने पुराने और तय रास्ते से होते हुए आगे बढ़ा। रास्ते में जगह-जगह सामाजिक संगठनों और शहर के लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। आखिर में, कटनी नदी के मसुरहा घाट पर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा की गई। प्रशासन के घाट पर बनाए गए अस्थायी कुंड में श्रद्धालुओं ने जवारों का विसर्जन किया। पुलिस और प्रशासन रहा मुस्तैद भीड़ और सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने जुलूस शुरू होने से पहले ही पूरे रास्ते का जायजा लिया और पुलिस बल को जरूरी निर्देश दिए। किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई थी। निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल पुलिस अधीक्षक की देखरेख में शहर के भीतर जुलूस शांतिपूर्ण और अनुशासन के साथ पूरा हुआ। अधिकारियों ने बताया कि पूरे रास्ते पर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी नजर रखी गई, जिससे कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के संपन्न हुआ।
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