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Sidhi News: मां कोटमहिन 15-16 गांवों की कुलदेवी हैं. नवरात्रि के समय गांव के हर घर में माता की स्थापना होती है और पूरे 9 दिनों तक पूजा-पाठ और भंडारे आदि का आयोजन किया जाता है. घने जंगल और जंगली जानवरों की मौजूदगी के बावजूद यहां आने वाले भक्तों को कभी कोई नुकसान नहीं हुआ.
सीधी. मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कोटमा पहाड़ पर विराजमान मां कोटमहिन का दरबार दूर-दूर तक प्रसिद्ध है लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि श्रद्धालु यहां पहुंचकर भी माता के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते. मां की प्रतिमा एक विशाल गुफा के भीतर स्थित है, जिसका रास्ता पिछले करीब 30 वर्षों से बंद है. इसके बावजूद हर साल खासकर चैत्र नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों को पार कर यहां पहुंचते हैं. नवरात्रि के अवसर पर कुसमी वनांचल में स्थित संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. दो पहाड़ों के बीच बसे इस धाम तक पहुंचना आसान नहीं है लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था हर मुश्किल पर भारी पड़ती है.
कुसमी निवासी राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा के जानकारी अनुसार, पहले श्रद्धालु गुफा के अंदर जाकर मां के दर्शन किया करते थे लेकिन एक विशाल पत्थर गिरने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया. तब से श्रद्धालु गुफा के बाहर से ही पूजा-अर्चना कर रहे हैं. खास बात यह है कि दर्शन बंद होने के बाद भी यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
इस तरह जंगल भेजी जाती है बीमारी
राजेंद्र विश्वकर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जब किसी गांव में बीमारी फैलती है, तो विशेष पूजा-अर्चना के साथ मुर्गी या बकरे के माध्यम से उस बीमारी को एक गांव से दूसरे गांव भेजा जाता है और अंत में जंगल की ओर विदा कर दिया जाता है. यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है और आज भी लोग इसे पूरी श्रद्धा से निभाते हैं. राजकुमार गढ़िया की जानकारी के अनुसार, माता का प्रभाव इतना प्रबल है कि लोग हर संकट में उनकी शरण लेते हैं. जब भी गांव में बीमारी फैलती है, तो माता की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है और फिर बीमारी को दूसरे गांव की ओर विदा किया जाता है. बीमारी जंगल में चली जाती है और वापस नहीं लौटती.
कई गांवों की कुलदेवी हैं मां कोटमहिन
रामकेश द्विवेदी के अनुसार, मां कोटमहिन करीब 15-16 गांवों की कुलदेवी हैं. नवरात्रि के दौरान हर घर में माता की स्थापना होती है और पूरे 9 दिनों तक पूजा-पाठ और भंडारे का आयोजन किया जाता है. घने जंगल और जंगली जानवरों की मौजूदगी के बावजूद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कभी कोई नुकसान नहीं हुआ. लोग इसे माता की कृपा मानते हैं. यही आस्था और विश्वास इस धाम को खास बनाता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.