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Gardening tips : आज हम आपको कुछ ऐसी भाजियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे एक बार ही उगाना पड़ता है. एक बार उगने के बाद फिर बार-बार इसे काट सकते हैं. आपको बाजार की सब्जी खरीदने की झंझट खत्म हो जाती है. ये भाजी लगभग 15 दिनों में तैयार हो जाती हैं. दरअसल, चैत्र महीने में छतरपुर जिले में मलमला, राम भाजी और पालक जैसी भाजिया जीरो बजट खर्च में घर पर लगा सकते हैं.
Agriculture Tips. आज हम आपको कुछ ऐसी भाजियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें एक बार ही उगाना पड़ता है. एक बार उगने के बाद इसे आप बार-बार काट सकते हैं. आपको बाजार की सब्जी खरीदने की झंझट खत्म हो जाती है. ये भाजी लगभग 15 दिनों में तैयार हो जाती हैं. फिलहाल चैत्र महीना चल रहा है तो आप भी नौनिया(मलमला),राम भाजी और पालक जैसी भाजी लगा सकते हैं जिसमें खर्च भी नहीं आता है. कैसे करें तैयार आइए जानते हैं.
छतरपुर की गृहिणी राधिका बाई लोकल 18 से बातचीत में बताती हैं कि उनके घर के पास खेत है, जहां कुछ जगह में मटर लगाया था. अब जब मटर की कटाई हो गई है, तो वे इस खाली पड़ी जगह में मलमला और पालक लगाने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि यह गर्मी के सीजन में बहुत खाया जाता है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है.
बेहद आसान है इसे उगाना
राधिका बताती हैं कि मलमला, राम भाजी और पालक उगाना बहुत आसान है. इसे लगाने के लिए किसी विशेष अनुभव या हुनर की जरूरत नहीं होती. घरेलू महिलाएं भी इसे घर के आंगन या छोटे गमलों में उगा सकती हैं.
मलमला या नौनिया भाजी लगाने के लिए सबसे पहले आपको बाजार से नौनिया खरीद लेना है. इसका सूखा साग बना लीजिए या मलमला कढ़ी बना लीजिए. पूरे मलमला भाजी की कढ़ी या सब्जी नहीं बनानी है. इसी में थोड़ा सा बचा लेना है. अब इसी से आपको अपने घर में मलमला भाजी लगा देना है. सबसे पहले मिट्टी को गीला कर लेना है. इसके बाद इस मिट्टी में मलमला की छोटी-छोटी डालें रोप देना है. सुबह और शाम थोड़ा थोड़ा पानी देना है. इसी डालों में नए-नए अंकुरण शुरू होते हैं. इस भाजी की खासियत होती है कि एक पौधा ही इतना फैलता है कि आप महीनों भर इसी को तोड़कर सब्जी और कढ़ी बना सकते हैं. इसी तरह राज भाजी भी लगा सकते हैं. इस भाजी को भी गर्मी सीजन में खूब खाया जाता है.
हालांकि, पालक के बीज आपको खरीदने पड़ेंगे क्योंकि हमने भी बीज से ही पालक भाजी लगाई थी. सबसे पहले मिट्टी को हल्का भुरभुरा कर लें और उसमें बीज डाल दें. किचन के सड़े-गले फल-सब्जी या गोबर की खाद डाल सकते हैं. पानी देते समय इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी न ज्यादा गीली हो और न ही पूरी तरह सूखी रहे. बस नमी बनी रहनी चाहिए.
15 दिन में तैयार हो जाती है फसल
गृहिणी बताती हैं कि बीज या पौधे रोपने के 15 दिन बाद मलमला तैयार हो जाता है. इसके बाद इसे काटकर उपयोग में लाया जा सकता है. मलमला को छाछ (मठ्ठा) के साथ मिलाकर कढ़ी बनाई जाती है. साथ ही इसका साग भी बनाया जाता है, जो खाने में स्वादिष्ट होता है.
जितना काटो, उतनी तेजी से बढ़ती
गृहिणी का कहना है कि मलमला की खासियत यह है कि इसे जितना काटोगे, उतनी तेजी से यह फिर उगती है. अगर आप इसे जड़ से काट भी दोगे तो भी यह खत्म नहीं होता है. यह बिल्कुल बरसीम चारे और पालक की तरह बढ़ती है. अगर हर दिन या 2-3 दिन के अंतराल में सुबह-सुबह पानी दिया जाए, तो यह पूरे गर्मी के मौसम में लगातार उगती रहती है और इसे बार-बार काटकर इस्तेमाल किया जा सकता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें