चर्चा में व्यापमं घोटाला, SC ने CBI और MP सरकार से मांगा जवाब, पूछा-क्या हुई कार्रवाई

चर्चा में व्यापमं घोटाला, SC ने CBI और MP सरकार से मांगा जवाब, पूछा-क्या हुई कार्रवाई


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Vypam Scam: मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले की चर्चा को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को की जाएगी.

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पारस सकलेचा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

Vypam Scam: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यवासायिक परीक्षा मंडल) घोटाले की जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने पूछा है कि 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है. सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर क्या एक्शन लिया गया है. इस बारे में बताएं.

सुप्रीम कोर्ट ने अब तक की गई जांच और चार्जशीट का पूरा ब्यौरा (शपथ पत्र) एफिडेविट के साथ मांगा है. अब अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है. पारस सकलेचा की तरफ से विवेक तन्खा ने पक्ष रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका अहम है.

इंदौर हाई कोर्ट ने खारिज कर दी पारस सकलेचा की याचिका
इसी मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट ने साल 2024 में पारस सकलेचा की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह मामले में सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष नहीं है. इसके बाद सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया था. जहां उनकी दलील को गंभीरता से लिया गया और कोर्ट ने जवाब तलब भी कर लिया.

साल 2013 में सामने आया था घोटाला
व्यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाला सबसे पहले साल 2013 में सामने आया था. प्रवेश परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में रिश्वत लेकर गलत उम्मीदवारों का चयन किया गया था. मामले ने तब और जोर पकड़ लिया, जब इसमें 40 से ज्यादा मौतें हो गईं. इसके बाद साल 2014 में पारस सकलेचा की तरफ से पहली शिकायत सामने आई. फिर साल 2015 में उन्होंने सबूत के तौर पर कई दस्तावेज भी पेश किए.

पारस सकलेचा ने दर्ज करवाए थे बयान
पारस सकलेचा ने सीबीआई को फरवरी 2016 और एसटीएफ को फरवरी और जून 2015 में बयान दिए थे. जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. आरोप है कि बड़े लोगों को बचाने के लिए दोनों ही संस्थाओं ने बयान को ठंडे बस्ते में डाल दिया.



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