चाहे कितनी भी तपे धरती, इंदौर का ये महल रहेगा कूल, 140 साल पुराना ‘हवा बंगला’ देखा आपने?

चाहे कितनी भी तपे धरती, इंदौर का ये महल रहेगा कूल, 140 साल पुराना ‘हवा बंगला’ देखा आपने?


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Indore Hawa Bangla Histroy: इंदौर का हवा बंगला एक 140 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है, जिसका निर्माण होलकर शासक शिवाजी राव होलकर ने करवाया था. यह महल अपने अनोखे डिजाइन और ठंडक देने वाली वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है. हालांकि समय के साथ यह इमारत जर्जर होती जा रही है और अब इसके संरक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है. कभी भूत बंगले के नाम से मशहूर यह जगह अब नगर निगम कार्यालय के रूप में इस्तेमाल हो रही है. इंदौर की यह धरोहर इतिहास, वास्तुकला और रहस्य का अनोखा संगम है, जिसे बचाना बेहद जरूरी है.

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर को सिर्फ खाने-पीने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं में से एक है शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित हवा बंगला. करीब 140 साल पुरानी ये इमारत आज भी अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन अब इसकी हालत धीरे-धीरे खराब होती जा रही है.

अब दिखने लगी उम्र की मार
हवा बंगला आज कई जगहों से जर्जर हो चुका है. दीवारों में पड़ी दरारें दूर से ही नजर आती हैं. कभी ये इमारत इतनी खामोश और डरावनी लगती थी कि लोग इसे “भूत बंगला” कहने लगे थे. हालांकि अब यहां नगर निगम का जोनल ऑफिस चल रहा है, जिससे थोड़ी मरम्मत और रंगाई-पुताई हुई है, लेकिन असली हालत अब भी सुधार मांग रही है.

होलकर राजवंश की शान
इस भव्य इमारत का निर्माण महाराज शिवाजी राव होलकर ने साल 1884 में करवाया था. उस समय यह महल गर्मियों में आराम करने के लिए खास तौर पर बनाया गया था. बताया जाता है कि इसे बनाने में उस दौर में करीब एक लाख रुपये खर्च हुए थे, जो उस समय बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी.

गर्मी में भी देता है ठंडक का एहसास
हवा बंगले की सबसे खास बात इसका डिजाइन है. बड़ी-बड़ी खिड़कियां, ऊंचे मेहराब और जालीदार झरोखे इस तरह बनाए गए हैं कि अंदर हमेशा ठंडक बनी रहती है. दूसरी मंजिल पर बने एक हॉल में 12 दरवाजे हैं, जहां आज भी खड़े होकर आपको तेज गर्मी में ठंडी हवा का एहसास होता है.

जहाज जैसा दिखता है पूरा महल
इस इमारत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामने से देखने पर यह किसी समुद्र में तैरते जहाज जैसा लगता है. ऊंची दीवारें और आगे का नुकीला हिस्सा इसे और भी खास बनाता है. अंदर के खंभे और नक्काशी कोरेथियन शैली की झलक देते हैं, जो इसकी शाही विरासत को दर्शाते हैं.

अब जरूरत है संरक्षण की
इतिहास और खूबसूरती से भरी इस इमारत को अब देखभाल की जरूरत है. अगर समय रहते इसका जीर्णोद्धार नहीं हुआ, तो इंदौर की ये अनमोल धरोहर धीरे-धीरे खत्म हो सकती है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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