बालाघाट जिले में पानी की किल्लत के बीच लालबर्रा के पांढरवाणी में महुआ तालाब का पानी बहाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जीर्णोद्धार के नाम पर खाली किए जा रहे इस तालाब को लेकर जनपद उपाध्यक्ष और स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। तालाब की पार (किनारा) तोड़कर और पंप लगाकर पानी बाहर निकाला जा रहा है, जिसे लेकर सरपंच पर सरकारी आदेशों की अनदेखी का आरोप लगा है। दरअसल, कलेक्टर ने जिले में बढ़ते जल संकट को देखते हुए 13 मार्च से 31 जुलाई तक बालाघाट को जल अभावग्रस्त घोषित कर रखा है। इस दौरान बिना अनुमति के पानी के स्रोतों से छेड़छाड़ या पानी निकालने पर पूरी तरह रोक है। भू-जल स्तर गिरने का डर विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पांढरवाणी में तालाब का पानी बिना वजह बहाया जा रहा है। इससे न केवल जमीन के अंदर पानी का लेवल गिरेगा, बल्कि प्रशासन के आदेशों की भी धज्जियां उड़ रही हैं। जनपद उपाध्यक्ष किशोर पालीवाल ने बताया कि तालाब में अभी भी 7 से 8 फीट पानी है। उन्होंने मांग की है कि क्षेत्र में पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करने वाले सरपंच पर कार्रवाई होनी चाहिए। सरपंच ने आरोपों को नकारा दूसरी तरफ, पांढरवाणी के सरपंच अनीश खान ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत महुआ तालाब के सुधार का काम नियमों के तहत ही कर रही है। इसके लिए जरूरी कागजी और तकनीकी मंजूरी (प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति) पहले ही ली जा चुकी है। सरपंच के मुताबिक, विरोधियों के आरोप बेबुनियाद हैं और काम पूरी तरह वैध है।
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