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Jabalpur 550 Year Old Mandir: जबलपुर का सिद्ध पीठ काली माई मंदिर एक 550 साल पुराना धार्मिक स्थल है, जिसकी कहानी बेहद रहस्यमयी और आस्था से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि मां काली की मूर्ति यहां खुद रुक गई थी और बंजारों को सपने में दर्शन देकर यहीं स्थापित होने का संकेत दिया था. यह मंदिर रानी दुर्गावती के समय से जुड़ा हुआ है और आज एक प्रमुख आस्था केंद्र बन चुका है. नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. देश-विदेश से आने वाले भक्त इस मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण यहां खिंचे चले आते हैं.
जबलपुर. चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर पूरा देश शक्ति की भक्ति में डूबा है. भक्त देवी के प्राचीन और सिद्ध पीठों के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं. ऐसे में आज हम आपको दर्शन करवाने जा रहे हैं संस्कारधानी जबलपुर के उस सिद्ध मंदिर के, जिसकी ख्याति सात समंदर पार तक फैली है. यह है सदर बाजार स्थित ‘सिद्ध पीठ काली माई मंदिर’.
इस मंदिर का इतिहास करीब 550 साल पुराना है और इसका संबंध वीरांगना रानी दुर्गावती के शासनकाल से जुड़ा है. जनश्रुतियों के अनुसार, उस दौर में बंजारों का एक समूह मां शारदा और मां काली की प्रतिमाओं को मंडला से जबलपुर की मदनमहल पहाड़ी पर ले जा रहा था. सफर के दौरान शाम होने पर बंजारों ने मूर्तियों को सदर के इसी स्थान पर विश्राम के लिए रखा.
जब टस से मस नहीं हुई प्रतिमा
हैरानी की बात तब हुई जब सुबह बंजारों ने आगे बढ़ने के लिए प्रतिमाएं उठानी शुरू कीं. मां शारदा की प्रतिमा तो आसानी से उठ गई, लेकिन मां काली की मूर्ति टस से मस नहीं हुई. बंजारों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा लिया, पर मैया वहीं अडिग रहीं.
बंजारों की बेटियों को दिया स्वप्न
मंदिर के पुजारी पंडित प्रवीण तिवारी ने बताया जब बंजारे परेशान हो गए, तब माता काली ने टोली की छोटी बच्चियों के सपने में आकर दर्शन दिए. माता ने स्पष्ट कह दिया, “अब मैं यहीं रहूंगी, यहाँ से कहीं नहीं जाऊंगी.” माता की इच्छा जानकर बंजारों ने वहां एक छोटी सी मढ़िया बनाई, मां की स्थापना की और भारी मन से आगे बढ़ गए. तब से माता यहीं विराजमान हैं और भक्तों का कल्याण कर रही हैं.
देश-विदेश से खिंचे चले आते हैं भक्त
आज यह मंदिर एक भव्य स्वरूप ले चुका है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से यहाँ अपनी अर्जी लगाता है, ‘बंजारों की देवी’ उसकी झोली खाली नहीं रहने देतीं. चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ का नजारा देखते ही बनता है. भक्तों का मानना है कि मंदिर की ऊर्जा इतनी सकारात्मक है कि यहाँ आते ही मानसिक शांति का अनुभव होता है. यही वजह है कि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देशभर और विदेशों से भी श्रद्धालु माता के दरबार में मत्था टेकने पहुंचते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें