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मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के गुनौर में पेट्रोल-डीजल संकट गहरा गया है. चार में से दो पंपों पर ही सीमित सप्लाई हो रही है. कई जगह डीजल खत्म है और पेट्रोल भी 300 रुपये तक दिया जा रहा है. अफवाहों के चलते पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं. किसानों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
पन्ना समेत एमपी के कई जिलों में पेट्रोल-डीजल पंपों पर भारी भीड़ देखी जा रही है.
शिवकांत आचार्य
पन्ना/भोपाल. मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल को लेकर अचानक बढ़ी भीड़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं. पन्ना जिले के गुनौर क्षेत्र में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर नजर आ रही है. यहां चार में से केवल दो पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन मिल रहा है. डीजल कई जगह पूरी तरह खत्म हो चुका है. इससे सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं. कई लोग घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं. इस हालात ने साफ कर दिया है कि अफवाहों के बीच बढ़ी मांग ने सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ा दिया है और जनजीवन पर सीधा असर पड़ रहा है. इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, शाजापुर, आगर मालवा, रतलाम, छिंदवाड़ा, रीवा और नर्मदापुरम जैसे जिलों में भी पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गई हैं. कुछ जगहों पर आधा किलोमीटर तक लाइनें लगने की जानकारी सामने आई है.
प्रदेश के अन्य जिलों में भी पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी जा रही है. सोशल मीडिया पर फैली खबरों और अंतरराष्ट्रीय तनाव की चर्चाओं के बाद लोगों में घबराहट बढ़ी है. इसी के चलते पैनिक बाइंग शुरू हो गई है. लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं. इसका असर छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिख रहा है, जहां सप्लाई चेन पहले से सीमित रहती है. प्रशासन भले ही पर्याप्त स्टॉक का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्थिति कई जगह अलग तस्वीर पेश कर रही है.
गुनौर में सबसे ज्यादा बिगड़े हालात
पन्ना जिले के गुनौर क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल संकट ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है. डिघोरा रोड स्थित पंप पर केवल 300 रुपये तक पेट्रोल दिया जा रहा है. ककरहटी रोड वाले पंप पर पेट्रोल और डीजल दोनों खत्म हैं. बराछ रोड के पंप पर डीजल नहीं मिल रहा. इससे वाहन चालकों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
किसानों पर सबसे ज्यादा असर
डीजल की कमी का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ा है. किसान अपने खेतों में काम नहीं कर पा रहे हैं. स्थानीय किसान मातेश्वरी पटेल ने बताया कि डीजल नहीं मिलने से ट्रैक्टर और सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं. कई किसानों को खाली लौटना पड़ रहा है.
अफवाहों से बढ़ा संकट
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. लोग केन, डिब्बे और बोतलें लेकर पंपों पर पहुंच रहे हैं. इससे जरूरतमंद लोगों को भी समय पर ईंधन नहीं मिल पा रहा है. राज्य सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों का कहना है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सप्लाई लगातार जारी है. अधिकारियों के अनुसार यह अस्थायी समस्या है, जो बढ़ी हुई मांग के कारण पैदा हुई है. लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें.
स्थानीय सप्लाई सिस्टम बना चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे कस्बों में डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर होने के कारण ऐसी स्थिति जल्दी बन जाती है. अगर मांग अचानक बढ़े तो सप्लाई बाधित हो जाती है. गुनौर जैसे क्षेत्रों में यही समस्या सामने आई है. स्थानीय लोगों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सप्लाई भेजी जाए. ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके और जनजीवन पटरी पर लौटे.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें