एक पत्ती वाला गांव…इस नाम के पीछे छुपा बड़ा राज, जानकर खुजाएंगे माथा!

एक पत्ती वाला गांव…इस नाम के पीछे छुपा बड़ा राज, जानकर खुजाएंगे माथा!


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Sagar Ajab Gajab Village: मध्यप्रदेश के सागर जिले का इकपना गांव एक अनोखे पेड़ की वजह से खास पहचान रखता है. यहां पलाश के पेड़ में तीन की जगह सिर्फ एक पत्ती निकलती है, जिससे गांव का नाम पड़ा है. ग्रामीण इसे देवी का चमत्कार मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसे जेनेटिक म्यूटेशन बताते हैं. इस दुर्लभ पेड़ को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. जानिए इस अनोखे गांव की पूरी दिलचस्प कहानी और इसके पीछे का सच.

Unique Villages of India: हमारे देश में हर गांव की अपनी एक अलग पहचान होती है. कहीं नाम इतिहास से जुड़ा होता है तो कहीं किसी खास घटना या प्रकृति की देन से. मध्यप्रदेश के सागर जिले का एक छोटा सा गांव ‘इकपना’ भी अपनी ऐसी ही अनोखी कहानी के लिए जाना जाता है. नाम सुनते ही लोगों के मन में सवाल आता है आखिर ऐसा नाम क्यों?

एक पत्ती वाले पेड़ से पड़ा नाम ‘इकपना’
नरयावली विधानसभा क्षेत्र में आने वाला यह गांव इन दिनों सिंचाई परियोजना को लेकर चर्चा में है, लेकिन इसकी असली पहचान एक बेहद अनोखे पेड़ से जुड़ी है. यहां पाए जाने वाले छेवला यानी पलाश (टेसू) के पेड़ में आम पेड़ों जैसी तीन पत्तियां नहीं होतीं, बल्कि हर डंठल में सिर्फ एक ही पत्ती निकलती है. यही वजह है कि गांव का नाम पड़ गया इकपना, यानी “एक पत्ती वाला गांव”.

ग्रामीण मानते हैं इसे देवी का चमत्कार
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यहां ऐसे करीब पांच पेड़ हुआ करते थे, लेकिन अब सिर्फ एक ही बचा है. इन पेड़ों के नीचे खैर माई को विराजमान किया गया है और लोग इसे देवी का चमत्कार मानते हैं. गांव वालों की आस्था इस पेड़ से गहराई से जुड़ी हुई है.

वैज्ञानिकों ने बताया असली कारण
वनस्पति शास्त्री डॉ. पी.के. खरे के अनुसार, इस तरह की पत्ती को “यूनिफोलिएट लीफ” कहा जाता है. सामान्य तौर पर पलाश के पेड़ में तीन पत्तियां होती हैं, लेकिन यहां यह नियम बदल गया है. इसका कारण “Genetic Mutation” यानी प्राकृतिक बदलाव है. इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा है और भारत में ऐसे पेड़ बहुत कम जगहों पर ही देखने को मिलते हैं.

दूर-दूर से लोग देखने आते हैं
जैसे ही लोगों को इस अनोखे पेड़ के बारे में पता चलता है, वे इसे देखने के लिए इकपना गांव पहुंच जाते हैं. यहां अक्सर बाहर से आने वाले लोगों का आना-जाना लगा रहता है. यह पेड़ अब गांव की पहचान बन चुका है.

धीरे-धीरे खत्म हो रही है ये खासियत
पहले जहां गांव में कई ऐसे पेड़ थे, अब सिर्फ एक ही बचा है. अगर इसका संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह अनोखी पहचान पूरी तरह खत्म हो सकती है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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