MS Dhoni लेफ्टिनेंट कर्नल पद… भारतीय सेना में धोनी को कितनी सैलरी मिलती है?

MS Dhoni लेफ्टिनेंट कर्नल पद… भारतीय सेना में धोनी को कितनी सैलरी मिलती है?


Last Updated:

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को साल 2011 में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानक उपाधि दी गई थी. जानकारी के मुताबिक तब से अब तक धोनी इस पद पर बने हुए हैं. भारत को तीन बार आईसीसी चैंपियन बनाने वाले इस कप्तान को लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर बहाल किए जाने पर कितनी सैलरी दी जाती है इसे सब जानना चाहते हैं.

खेल क्षेत्र में खिलाड़ी अपनी उपलब्धियों से देश का नाम रोशन करते हैं. उन्हें सम्मानित करने के लिए केंद्र सरकार पुलिस, सेना सहित विभिन्न बलों में मानद पद देकर खिलाड़ियों को सम्मानित करती है. इसी तरह, सचिन, धोनी जैसे देश का नाम ऊंचा करने वाले खिलाड़ी भारतीय सेना में मानद पद संभाल रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम को टी20, वनडे और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट जिताने वाले पूर्व कप्तान एम.एस. धोनी सेना में पद संभाल रहे हैं. 2011 में उन्हें सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया था.

2019 में जम्मू-कश्मीर में सेना के जवानों के साथ कुछ समय तक धोनी ने सेवा दी थी. उन्होंने विशेष पैरा जंपिंग की ट्रेनिंग भी ली है और वे पैरा कमांडो भी हैं. भारतीय सेना की टेरिटोरियल आर्मी की पैरा रेजिमेंट में धोनी ने सेवा दी है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

टेरिटोरियल आर्मी भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह भारतीय सेना का रिजर्व बल है. सेना को सपोर्ट करने वाली पार्ट टाइम वॉलंटियर्स की इस रिजर्व फोर्स को ‘टेरिटोरियल आर्मी’ कहा जाता है.

देश को खतरा होने या आपदा के समय ये लोग सेना के साथ मिलकर काम करते हैं. इस डिवीजन की 106 बटालियन में धोनी ने सेवा दी है. सेना में पद संभाल रहे धोनी को कितनी सैलरी मिलती है, इसको लेकर जानकारी हम आपको देते हैं.

टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल के तौर पर धोनी की सैलरी 1.21 लाख रुपये से 2.12 लाख रुपये तक हो सकती है. भारतीय सेना में धोनी के रैंक वाले अफसरों को इतनी सैलरी मिलती है. लेकिन मानद पद पर होने के कारण धोनी को यह सैलरी नहीं मिलती.

मानद अधिकारी सेवा अधिकारी नहीं होते. वे सेना के लिए कोई ड्यूटी नहीं निभाते, इसलिए उन्हें कोई वेतन या मानद भत्ता नहीं दिया जाता. मशहूर हस्तियों को ऐसे मानद पद देने का मकसद आम जनता का ध्यान सशस्त्र बलों की ओर आकर्षित करना होता है.



Source link